हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। इस व्रत में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इसके साथ ही समस्याओं से भी निजात मिलती है। दिवाली से पहले इस व्रत का विशेष महत्व होता है और इसे सही समय पर किया जाना शुभ माना जाता है।
प्रदोष व्रत की तिथि
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर प्रारंभ होगी और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। इस अवधि के दौरान, प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए, 6 नवंबर को प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 6 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। इस समय के दौरान भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जा सकती है।
पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। शिवलिंग का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके पश्चात भगवान शिव को चंदन, बेलपत्र, फूल और धतूरा अर्पित करें।
शक्कर और घी से बनी मिठाई का भोग लगाएं और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। शिव चालीसा का पाठ करें और प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें। घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें। दिनभर उपवास रखते हुए शिव का स्मरण करते रहें।
Source: NDTV India
