मुंबई में हाल ही में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपने चर्चित किरदारों के बारे में खुलकर बातचीत की। इस कार्यक्रम का आयोजन मुक्ति कल्चरल ऑडिटोरियम में किया गया था, जहाँ 4PM के संपादक संजय शर्मा ने उनसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
किरदारों की बैकस्टोरी पर विचार
मनोज बाजपेयी ने अपने किरदारों की तैयारी की प्रक्रिया के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी भूमिका को निभाने से पहले वे उसकी पूरी बैकस्टोरी अपने दिमाग में तैयार करते हैं। उदाहरण के लिए, ‘द फैमिली मैन’ के श्रीकांत तिवारी के किरदार को निभाने के लिए उन्होंने उसके जीवन के विभिन्न पहलुओं की कल्पना की थी।
श्रीकांत तिवारी के बारे में उन्होंने कहा कि यह बनारस का व्यक्ति था जिसने दिल्ली में पढ़ाई की और फिर इंटेलिजेंस एजेंसी में काम किया। इस प्रकार, उसके बोलने और व्यवहार में दोनों स्थानों की छाप दिखाई देती है।
गालियों का महत्व
मनोज बाजपेयी ने फिल्मों में गालियों के इस्तेमाल पर भी बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि गालियों का इस्तेमाल केवल किरदार की प्रामाणिकता को बनाए रखने के लिए किया जाता है, न कि किसी को खुश करने के लिए। उनके अनुसार, अगर किसी चरित्र की पृष्ठभूमि में गालियाँ शामिल हैं, तो उन्हें उसी रूप में दिखाना आवश्यक होता है।
सरदार खान का विश्लेषण
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में सरदार खान के किरदार पर चर्चा करते हुए, मनोज बाजपेयी ने कहा कि यह पारंपरिक माफिया किरदार नहीं था। उन्होंने उसे ‘बैल बुद्धि’ वाला व्यक्ति कहा, जो बिना परिणामों की परवाह किए अपने स्वभाव के अनुसार काम करता है।
उनके अनुसार, सरदार खान एक ऐसा व्यक्ति था जो अपने लक्ष्य से भटक सकता था और जिसके निर्णय अक्सर उसके आवेगों से प्रभावित होते थे।
भीकू म्हात्रे और श्रीकांत तिवारी
मनोज बाजपेयी ने अपने सबसे यादगार किरदारों में भीकू म्हात्रे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘सत्या’ का भीकू म्हात्रे बेहद भावुक और अप्रत्याशित स्वभाव का था, जो दर्शकों के दिलों में आज भी जीवित है।
वहीं, श्रीकांत तिवारी के बारे में उन्होंने कहा कि यह किरदार वर्तमान समय में सबसे प्रासंगिक है। यह एक समझदार और तेजी से निर्णय लेने वाला व्यक्ति है, जो दर्शकों के साथ आसानी से जुड़ता है।
‘शूल’ का महत्व
मनोज बाजपेयी ने फिल्म ‘शूल’ की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि ‘सत्या’ की सफलता के बाद वे एक प्रमुख भूमिका की तलाश में थे और ‘शूल’ उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई।
Source: NDTV India
