पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (पीपीएससी) द्वारा आयोजित पीसीएस मेन्स परीक्षा-2025 के परिणामों को लेकर उठे विवाद पर चेयरमैन ने आरोपों को खारिज कर दिया है। चेयरमैन रिटायर्ड मेजर जनरल विनायक सैनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि परिणाम को लेकर लगाए गए आरोप गलत व्याख्या पर आधारित हैं।
आंकड़ों की गलत व्याख्या
चेयरमैन सैनी ने कहा कि परीक्षा केंद्रों और कक्षाओं के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों के आंकड़े पेश किए गए हैं और किसी भी अनियमितता का कोई प्रमाण नहीं है। पटियाला में 12 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में 3,959 अभ्यर्थियों ने भाग लिया, जिनमें से 751 को इंटरव्यू के लिए चुना गया।
उन्होंने बताया कि एक सेंटर से 24 प्रतिशत चयन का दावा गलत है। किसी भी एक सेंटर से अधिकतम 106 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जो कुल 751 चयनित उम्मीदवारों का 14.1 प्रतिशत है।
क्लासरूम और रोल नंबर का ट्रेंड
क्लासरूम के चयन पर उठे सवालों के जवाब में चेयरमैन ने बताया कि 179 में से केवल तीन क्लासरूम ऐसे थे, जहां से 10 या अधिक अभ्यर्थी सफल हुए। उन्होंने यह भी कहा कि लगातार रोल नंबर वाले उम्मीदवारों के चयन का ट्रेंड नया नहीं है और यह पिछले वर्षों में भी देखा गया है।
वर्ष 2025 के 751 चयनित अभ्यर्थियों में लगातार रोल नंबर वाले 118 समूह बने हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में असामान्य नहीं है।
राजनीतिक हस्तक्षेप और सुरक्षा
परीक्षा केंद्रों के चयन में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों पर चेयरमैन ने कहा कि केंद्रों का निर्धारण प्रशासनिक और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया था। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप का सामना नहीं करना पड़ा।
परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी, कंट्रोल रूम और बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था की गई थी।
Source: NDTV India
