कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य में मौत की सजा पाए 548 कैदियों की सजा को बिना पैरोल आजीवन कारावास में बदलने का निर्णय लिया है। यह निर्णय अमेरिकी इतिहास में सबसे बड़ी सामूहिक दया याचिका कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
गवर्नर का निर्णय और उसके पीछे की सोच
गवर्नर गेविन न्यूजॉम, जो लंबे समय से मृत्युदंड के विरोधी रहे हैं, ने अपने कार्यकाल के अंत में यह कदम उठाया है। उन्होंने एक सार्वजनिक पत्र में बताया कि यह निर्णय उन्होंने इसलिए लिया क्योंकि राज्य द्वारा किसी व्यक्ति की हत्या किया जाना कैलिफोर्निया के मूल्यों के विपरीत है।
न्यूजॉम ने कहा कि यह व्यवस्था न्याय प्रणाली की बुनियाद को कमजोर करती है और समाज की मानवीय संवेदनाओं को प्रभावित करती है। 2019 में ही उन्होंने कैलिफोर्निया में फांसी की सजा पर रोक लगाने की घोषणा कर दी थी।
कैदियों पर प्रभाव और कानूनी प्रक्रिया
गवर्नर कार्यालय के अनुसार, इस फैसले से 548 कैदी प्रभावित होंगे, जिनमें 529 पुरुष और 19 महिलाएं शामिल हैं। हालांकि, सभी मामलों में यह निर्णय तुरंत लागू नहीं होगा। कैलिफोर्निया के संविधान के अनुसार, जिन लोगों को एक से अधिक गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया है, उनके लिए दया याचिका पर अंतिम मंजूरी राज्य के सुप्रीम कोर्ट से लेनी होगी।
डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर के मुताबिक, यदि सभी याचिकाएं मंजूर हो जाती हैं, तो यह अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ी सामूहिक दया याचिका कार्रवाई होगी।
पीड़ित परिवारों और संगठनों की प्रतिक्रिया
इस निर्णय पर पीड़ित परिवारों और अभियोजन पक्ष के प्रतिनिधियों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई पीड़ित परिवारों ने इस फैसले का विरोध किया है, जबकि अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) ने इसका स्वागत किया है। ACLU का मानना है कि मृत्युदंड प्रणाली नस्लीय असमानताओं और न्यायिक भूलों से जुड़ी रही है।
कैलिफोर्निया डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नीज एसोसिएशन ने इस फैसले की निंदा की है, जबकि कुछ अन्य संगठनों ने इसे न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
भविष्य की संभावना
न्यूजॉम का यह निर्णय तब आया है जब वह अपने आठ साल के कार्यकाल के बाद पद छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। नए गवर्नर जेवियर बेसेरा ने पहले ही संकेत दिया है कि वह राज्य में मृत्युदंड पर लागू रोक को जारी रखेंगे।
कैलिफोर्निया में पिछले दो दशकों से किसी को फांसी नहीं दी गई है, जबकि राज्य के मतदाता 2012 और 2016 में मृत्युदंड को बनाए रखने के पक्ष में मतदान कर चुके हैं।
Source: NDTV India
