सूडान एक ऐसे संकट का सामना कर रहा है जो वहां के निवासियों के लिए जीवन जीना मुश्किल बना रहा है। सालों से जारी गृहयुद्ध ने सूडान की आर्थिक स्थिति को बदतर कर दिया है। देश की दो सशस्त्र सेनाओं के बीच चल रहे इस संघर्ष ने सूडान के नागरिकों की दैनिक ज़रूरतें भी छीन ली हैं।
भोजन की कमी और बढ़ती कीमतें
गृहयुद्ध के चलते सूडान में खाद्य सुरक्षा एक गंभीर समस्या बन गई है। राजधानी खार्तूम में रोटी जैसी बुनियादी ज़रूरत भी अब एक महंगा सौदा बन गई है। 44 वर्षीय सौसन महमूद बताती हैं कि उनके परिवार की सारी कमाई अब रोटी खरीदने में खर्च हो जाती है।
पिछले एक हफ्ते में खार्तूम में रोटी की कीमत 250 सूडानी पाउंड से बढ़कर 500 सूडानी पाउंड हो गई है। यह दोगुनी वृद्धि उन परिवारों के लिए भारी पड़ रही है जो पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। महमूद के परिवार को अब दिन में सिर्फ एक बार रोटी मिल पाती है।
अकाल की स्थिति
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण कोर्डोफान और उत्तरी दारफुर के इलाकों में 2 लाख से अधिक लोग अकाल का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि 2027 तक यह स्थिति और भी शहरों तक फैल सकती है।
देश की मुद्रा सूडानी पाउंड की गिरती कीमत ने स्थिति को और विकट बना दिया है। डॉलर के मुकाबले सूडानी पाउंड की कीमत में 25 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे ईंधन और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो रही है।
ईंधन की कमी और आर्थिक संकट
सूडान में ईंधन की भारी कमी है, जिससे ग्रामीण इलाकों में गेहूं की आपूर्ति बाधित हो रही है। ईंधन की कमी, बढ़ती कीमतें और सड़कें बंद होने के कारण ग्रामीण इलाकों तक सहायता पहुंचाना मुश्किल हो गया है।
खार्तूम के बाहर स्थित ओम्दुरमान के बाजार में खरीदारी कर रहे अल-मुरादी अवद ने कहा कि जीवन-स्थितियां बहुत खराब हो गई हैं। एक किलो मांस की कीमत इतनी बढ़ गई है कि अब लोग केवल 125 ग्राम ही खरीद पा रहे हैं।
Source: NDTV India
