लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में सितंबर में हुई हिंसा के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। यह मामला अब ‘साइबर आतंकवाद’ से जुड़ा हो सकता है, जिसके चलते इस पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जांच की संभावना बढ़ गई है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में केंद्र सरकार को 72 घंटों के भीतर एक रिपोर्ट सौंपे। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या इस मामले में आईटी एक्ट की धारा 66F लागू होती है, जो साइबर आतंकवाद से संबंधित है।
हाई कोर्ट के निर्देश और संभावित NIA जांच
हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को NIA एक्ट की धारा 6 के तहत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। यदि राज्य सरकार को किसी ऐसे अपराध की जानकारी मिलती है जो NIA एक्ट के दायरे में आता है, तो उसे केंद्र को सूचित करना आवश्यक होता है। हाई कोर्ट ने केंद्र से यह भी कहा है कि रिपोर्ट मिलने के सात दिनों के भीतर इस पर निर्णय लिया जाए कि क्या NIA को जांच सौंपी जानी चाहिए।
पंजाब पुलिस की जांच में कुछ सबूत मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि इसमें साइबर आतंकवाद के पहलू शामिल हो सकते हैं। अगर केंद्र सरकार NIA को जांच सौंपने का फैसला करती है, तो पंजाब पुलिस को अपनी जांच रोकनी होगी और सभी दस्तावेज NIA को सौंपने होंगे।
हिंसा की शुरुआत और इसके कारण
LPU में हिंसा 27 सितंबर को भड़की थी, जब एक छात्रा के कथित यौन उत्पीड़न की अफवाह फैल गई थी। इस अफवाह ने छात्रों में अशांति फैला दी, जिसके परिणामस्वरूप यूनिवर्सिटी परिसर में आगजनी और लूटपाट की घटनाएं हुईं। पुलिस ने यौन उत्पीड़न के आरोपों पर एक आपराधिक मामला दर्ज किया था, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हो पाई।
हिंसा के चलते यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित कर दी थीं। इस मामले में एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी, जिसमें CBI जांच की मांग की गई थी। हालांकि, पंजाब पुलिस की जांच में साइबर आतंकवाद का पहलू सामने आने के बाद NIA जांच की संभावना बढ़ गई है।
अगली सुनवाई और आगे की प्रक्रिया
इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी, जिसमें यह स्पष्ट हो सकता है कि केंद्र सरकार इस मामले को NIA के माध्यम से जांच कराएगी या नहीं। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस सुनवाई में अब तक के घटनाक्रम की जानकारी प्रस्तुत करें।
Source: NDTV India
