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क्या ट्रंप की नीति से इजरायल की सैन्य मदद पर असर पड़ेगा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यह घोषणा की है कि 2026 के अंत तक इजरायल को दी जाने वाली चार अरब डॉलर की अमेरिकी फंडिंग को रोक दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह निर्णय ईरान को नियंत्रित करने की ट्रंप की योजना का हिस्सा है।

इजरायल-अमेरिका संबंधों का इतिहास

1960 के दशक की शुरुआत में अमेरिकी राजनयिकों का एक समूह इजरायली हेलीकॉप्टर में सवार था। इस दौरान उन्होंने नेगेव रेगिस्तान में एक निर्माण स्थल देखा, जिसे इजरायली अधिकारियों ने ‘टेक्सटाइल फैक्ट्री’ बताया। लेकिन वास्तव में यह डिमोना परमाणु सुविधा का निर्माण स्थल था।

इस घटना के कुछ महीनों बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इस निर्माण स्थल की असल सच्चाई का पता लगाया। तब से अमेरिका और इजरायल ने इस मामले पर चुप्पी साधे रखी है और इजरायल के परमाणु हथियारों के विकास को कभी स्वीकार नहीं किया है।

ट्रंप की नीति और संभावित प्रभाव

अमेरिका और इजरायल के बीच लंबे समय से चली आ रही नीति अस्पष्टता की स्थिति बनाए रखने की रही है। इजरायल के परमाणु हथियारों की ओर इशारा तो किया जाता है, लेकिन कभी भी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की जाती। इस नीति ने अमेरिका को अन्य देशों द्वारा परमाणु हथियार विकसित करने के प्रयासों के खिलाफ अपना सार्वजनिक रुख बनाए रखने में मदद की है।

हालांकि, ट्रंप की नई घोषणा के बाद यह स्थिति बदल सकती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इजरायल की सैन्य ताकत को कमजोर करने की दिशा में एक कदम हो सकता है।

ईरान पर संभावित प्रभाव

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग का एक मकसद तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। लेकिन अब तक अमेरिका इसे रोकने में पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया है। ऐसे में इजरायल की सैन्य और परमाणु ताकत बातचीत की मेज पर आती रहती है।

अमेरिका की इस नई नीति से यह सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप प्रशासन अब इजरायल की सैन्य ताकत को कमजोर करने का मन बना रहा है।

Source: NDTV India

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