कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी नई पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ में भारत के राजनीतिक इतिहास के महत्वपूर्ण और भावुक पलों को याद किया है। इस पुस्तक में उन्होंने 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस से लेकर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद के घटनाक्रम तक के अपने अनुभव साझा किए हैं।
बाबरी मस्जिद विध्वंस का दर्द
सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण में लिखा है कि दिसंबर 1992 में जब वे टेलीविजन पर बाबरी मस्जिद का विध्वंस देख रही थीं, तब उनकी आंखों से आंसू बह निकले थे। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें अहसास हुआ कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अन्य नेताओं द्वारा कल्पना की गई धर्मनिरपेक्ष भारत की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष करना होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि उस समय अयोध्या आंदोलन तेजी से राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन रहा था। मस्जिद को लेकर यह दावा जोर पकड़ रहा था कि उसका निर्माण एक प्राचीन मंदिर के अवशेषों पर हुआ था, जिससे देश की राजनीति और समाज पर गहरा असर पड़ा।
इंदिरा गांधी की हत्या का दर्दनाक अनुभव
सोनिया गांधी ने 31 अक्टूबर 1984 की घटनाओं को भी विस्तार से याद किया है। उन्होंने लिखा कि उस दिन अचानक गोलियों की आवाज सुनाई दी और कुछ देर बाद उन्हें पता चला कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर हमला हुआ है। अस्पताल पहुंचने से लेकर उनके निधन की खबर मिलने तक के हर पल को उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में बयान किया है।
राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने की घटना
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की बात सामने आई, तो सोनिया गांधी ने उस क्षण का भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि यह सुनकर वह अंदर तक हिल गईं और उन्हें अपने पति की सुरक्षा की चिंता सताने लगी। जब उन्होंने राजीव गांधी से यह जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करने का आग्रह किया, तो राजीव ने जवाब दिया, “वे वैसे भी मुझे मार डालेंगे।”
Source: NDTV India
