पंजाब के मानसा जिले में परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उत्पन्न तनाव को शांत करने के लिए राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और दो करोड़ रुपये मुआवजे का आश्वासन दिया है। इस समझौते के बाद परिवार ने परविंदर सिंह का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।
सरकार और परिवार के बीच समझौता
पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्रियों और पीड़ित परिवार के बीच एक बैठक हुई, जिसमें सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। समझौते के अनुसार, परविंदर सिंह की पत्नी को उनकी योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी और दो करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
साथ ही, सरकार ने यह भी घोषणा की है कि परविंदर सिंह के पिता और एंटी ड्रग टास्क फोर्स के सदस्यों पर लगे आरोप हटा दिए जाएंगे। लुधियाना में प्रदर्शन के दौरान मारे गए युवक के परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
समारोह और स्मारक की योजना
समझौते के तहत, सरकार मानसा में परविंदर सिंह झोटा का एक स्मारक स्थापित करेगी। उनके नाम पर मंसा जिले के गांव ख्याला में एक ट्रॉमा सेंटर भी बनाया जाएगा, जिसकी मंजूरी जल्द ही दी जाएगी।
इस समझौते में एक शर्त यह भी है कि परविंदर सिंह का पोस्टमार्टम 6 नवंबर को किया जाएगा, जिसके बाद अंतिम संस्कार होगा।
हत्या की पृष्ठभूमि
परविंदर सिंह झोटा की हत्या 13 अक्टूबर 2026 को हुई थी, जब वे फेसबुक पर लाइव थे। इस घटना के बाद राज्य में भारी विरोध प्रदर्शन हुए और राजनीतिक बहस भी तेज हो गई। विपक्षी दलों ने सरकार पर नशा तस्करी रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया।
सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और पंजाब सरकार ने कुछ अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया है।
Source: NDTV India
