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22 वर्षीय ओवैस की सफलता की कहानी: ChatGPT बना मार्गदर्शक, UPSC CDS में AIR 107

कश्मीर के पुलवामा जिले के डेंजरपोरा क्षेत्र के निवासी 22 वर्षीय मोहम्मद ओवैस भट ने UPSC CDS परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 107 प्राप्त कर क्षेत्र में एक नई प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। यह सफलता उन्हें दो असफलताओं के बाद तीसरे प्रयास में मिली। ओवैस ने अपनी तैयारी के दौरान ChatGPT और अन्य AI टूल्स का उपयोग किया।

ChatGPT ने निभाई अहम भूमिका

ओवैस की सफलता का मुख्य कारण उनका अद्वितीय तैयारी का तरीका है। उन्होंने महंगी कोचिंग के बजाय AI टूल्स का सहारा लिया। ओवैस ने 399 रुपये के एक पेड AI सब्सक्रिप्शन का उपयोग कर अपना पूरा सिलेबस अपलोड किया और परीक्षा के ट्रेंड्स का विश्लेषण कराया। इससे उन्हें प्रश्नों के पैटर्न और संभावित विषयों की पहचान में मदद मिली।

ओवैस का कहना है कि AI की मदद से उन्हें परीक्षा में आने वाले लगभग 20 से 40 प्रश्नों के स्वरूप का पहले से अंदाजा लगा। उनका मानना है कि यदि सही दिशा में AI टूल्स का उपयोग किया जाए, तो यह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को अधिक प्रभावी बना सकता है।

सिलेबस को समझने की दी सलाह

ओवैस का मानना है कि सफलता के लिए सबसे पहले सिलेबस को गहराई से समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बिना सिलेबस को समझे तैयारी शुरू करना, किसी व्यक्ति को समुद्र में छोड़ देने जैसा है। ओवैस के अनुसार, यदि अभ्यर्थी सिलेबस को समझकर रणनीति बनाएं, तो सफलता प्राप्त करना आसान हो जाता है।

फिजिकल फिटनेस पर जोर

CDS की तैयारी केवल लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं होती है। इसमें शारीरिक दक्षता भी महत्वपूर्ण है। ओवैस ने बताया कि लिखित परीक्षा की तैयारी के दौरान उनका वजन 20 किलो से अधिक बढ़ गया था। लेकिन शारीरिक परीक्षण के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और दो महीने में 20 किलो वजन कम कर लिया।

परिवार और प्रेरणा स्रोत

ओवैस अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के निरंतर सहयोग को देते हैं। उनके अनुसार, परिवार ने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया। प्रेरणा के स्रोत के रूप में उन्होंने भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी ब्रिगेडियर एस.एस. शेखावत का नाम लिया, जिनके व्यक्तित्व और उपलब्धियों ने उन्हें प्रेरित किया।

नए सफर की शुरुआत

CDS परीक्षा में सफलता के बाद ओवैस जनवरी में देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी में प्रशिक्षण शुरू करेंगे। डेढ़ वर्ष के प्रशिक्षण के बाद उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन मिलेगा। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सीमित संसाधन और असफलताएँ भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सही दिशा में हो।

Source: NDTV India

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