अनुराधा पौडवाल का भोजपुरी छठ गीत वर्षों से बिहार के लोगों के दिलों पर राज कर रहा है। छठ पूजा के दौरान यह गीत पंडालों और घाटों में विशेष रूप से सुनाई देता है। पौडवाल, जो हिंदी गानों और भजनों के लिए जानी जाती हैं, ने कई भोजपुरी गाने भी गाए हैं। हालांकि, छठ गीतों की बात करें तो उनकी आवाज़ में भक्ति की विशेष महिमा देखने को मिलती है।
छठ पूजा में गीतों का महत्व
छठ पूजा दिवाली के छह दिन बाद मनाई जाती है और इस दौरान छठ के गीतों का विशेष महत्व होता है। इन गीतों में अनुराधा पौडवाल का गाना ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ बहुत प्रसिद्ध है। शारदा सिन्हा जैसी दिग्गज गायिका ने भी इसे गाया है, लेकिन पौडवाल का संस्करण भी फैंस के बीच बेहद लोकप्रिय है। यह गीत छठ पूजा के दौरान घाटों, घरों और पूजा स्थलों पर विशेष रूप से बजता है।
लोकप्रियता और भक्ति का संगम
‘कांच ही बांस के बहंगिया’ गीत बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड की लोक परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसमें छठ व्रती की भक्ति, समर्पण और छठी मैया के प्रति अटूट आस्था का वर्णन किया गया है। इस गीत के बोल छठ पर्व में सूर्य उपासना और कठोर व्रत को आसान बना देते हैं।
अनुराधा पौडवाल के अन्य प्रसिद्ध गीत
अनुराधा पौडवाल के बॉलीवुड गानों में ‘धीरे धीरे मेरी जिंदगी में आना’, ‘नजर के सामने’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘बहुत प्यार करते हैं’, ‘धक धक करने लगा’ और ‘मुझे नींद ना आए’ शामिल हैं। इसके अलावा, उनके भक्ति गीत जैसे ‘मैया यशोदा’, ‘मन मेरा मंदिर’, ‘शिव मेरी पूजा’, ‘ओम जय जगदीश हरे’, ‘शिव अमृतवाणी’ भी मशहूर हैं।
Source: NDTV India
