हाल ही में केंद्र सरकार ने दो बड़े फैसले लिए हैं, जिनमें UGC के नियमों पर पुनर्विचार और अग्निपथ योजना में बदलाव शामिल हैं। इन फैसलों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या बीजेपी आगामी चुनावों के मद्देनजर डैमेज कंट्रोल कर रही है।
सरकार के फैसले
पहला बड़ा बदलाव अग्निपथ योजना में किया गया है। इस योजना के तहत अब अग्निवीरों को दो साल का एक्सटेंशन मिलेगा। पहले योजना में यह प्रावधान था कि चार साल की सेवा के बाद 25% अग्निवीरों को ही सेना में स्थायी किया जाएगा, जबकि बाकी 75% को सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा। अब इन 75% अग्निवीरों को भी दो साल का एक्सटेंशन मिलेगा और दो साल बाद उन्हें स्थायी करने का विकल्प होगा।
दूसरे फैसले में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि UGC के नियमों पर पुनर्विचार किया जाएगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार इन नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने पर विचार कर रही है।
राजनीतिक पहलू
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये निर्णय बीजेपी द्वारा आगामी चुनावों के मद्देनजर उठाए गए हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में बीजेपी को झटका लगा था। यूपी और बिहार में UGC नियमों के चलते बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि UGC नियमों को लेकर बीजेपी का कोर वोटर बेस नाराज है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि राज्य की सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को 20% आरक्षण दिया जाएगा।
चुनावी रणनीति
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, और पंजाब जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों में होने वाले हैं, जहां के अधिकांश युवा सेना में भर्ती होते हैं। इसलिए अग्निपथ योजना में बदलाव को चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
ये निर्णय बीजेपी की चुनावी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं, जिससे वे अपने कोर वोटर बेस को पुनः आकर्षित कर सकें।
Source: NDTV India
