डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन को अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार से अमेरिका ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इस पर विभिन्न देशों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं।
अमेरिका में सत्ता संतुलन
मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने दोनों सदनों पर कब्जा जमा लिया है, जिससे ट्रंप की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो गई है। अब उनके फैसले डेमोक्रेटिक पार्टी की सहमति पर निर्भर करेंगे। इस पर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि ट्रंप की शासनशैली में कोई खास बदलाव नहीं होगा क्योंकि उन्होंने पहले भी कार्यकारी आदेशों के माध्यम से शासन किया है।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने इस हार को दक्षिणपंथी विचारधारा के कमजोर होने का संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव ब्राजील में हुआ, अब अमेरिका में हुआ और जल्द ही स्पेन में भी होगा।
रूस और यूरोप की प्रतिक्रिया
रूस के क्रेमलिन ने उम्मीद जताई कि ट्रंप शांति स्थापना की अपनी कोशिशें जारी रखेंगे। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ट्रंप अपनी शक्तियों का उपयोग जारी रखेंगे।
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने उम्मीद जताई है कि नई अमेरिकी कांग्रेस रूस पर दबाव बढ़ाएगी और यूक्रेन का समर्थन करेगी।
अन्य देशों की प्रतिक्रियाएँ
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने इस नतीजे को अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के बीच संबंध सुधारने का मौका बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से भू-राजनीतिक और व्यापारिक मामलों में प्रगति हो सकती है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के रुख में बदलाव की संभावना को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका से किसी रियायत की उम्मीद करना गलतफहमी होगी।
उत्तर कोरिया और यूक्रेन की स्थिति
उत्तर कोरिया की किम यो जोंग ने अमेरिका के साथ बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि प्योंगयांग को अविश्वसनीय और शत्रुतापूर्ण लोगों के साथ बात करने की कोई जरूरत नहीं है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि कांग्रेस के समर्थन से यूक्रेन को अधिक सहायता मिल सकती है, जिससे रूस पर दबाव बढ़ेगा और शांति की संभावना बढ़ेगी।
Source: NDTV India
