महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत ₹1.5 लाख करोड़ के AI डेटा सेंटर और सोलर हब की स्थापना की योजना बनाई गई है। इस परियोजना के बारे में जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए किसी भी निजी जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा।
2031 तक बदल जाएगी सोलापुर की तस्वीर
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना को वर्ष 2031 तक चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। परियोजना से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होने की संभावना है, जिसमें 40 हजार से अधिक नौकरियों का सृजन हो सकता है। इनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार की नौकरियां शामिल होंगी। प्रारंभिक चरण में लगभग 2,800 प्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है।
कलेक्टर की ओर से स्पष्टता
सोलापुर के कलेक्टर ने यह स्पष्ट किया है कि परियोजना के लिए किसी भी निजी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी और परियोजना को लेकर फैलाई जा रही गलतफहमियां तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि परियोजना के लिए कोई निजी भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं है और किसानों के अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाएगा।
पानी की खपत और आर्थिक लाभ
उजनी बांध से जुड़े इस प्रोजेक्ट के संदर्भ में प्रशासन ने बताया कि AI डेटा सेंटर परियोजना में केवल 0.5 TMC पानी की जरूरत होगी, जिससे सिंचाई या पेयजल आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। प्रशासन ने यह भी कहा कि परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ होगा। इससे प्रतिवर्ष करीब ₹200 करोड़ का राजस्व उत्पन्न हो सकता है।
इस परियोजना के माध्यम से सोलापुर को एक नए औद्योगिक और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां इसे महाराष्ट्र के सबसे बड़े तकनीकी और ऊर्जा निवेशों में से एक मान रही हैं।
Source: NDTV India
