मध्य पूर्व में युद्ध का एक नया और खतरनाक मोर्चा खुल गया है। अब यमन और लाल सागर इस संघर्ष के नवीनतम युद्धक्षेत्र बन गए हैं। यह क्षेत्रीय संघर्ष को व्यापक बनाते हुए अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव में एक नई परत जोड़ रहा है।
ईरान-समर्थित समूहों की भूमिका
ईरान समर्थित अंसारुल्लाह हौथी और इराकी मिलिशिया का प्रवेश सऊदी अरब के लिए एक गंभीर सुरक्षा और आर्थिक खतरा बन गया है। इससे तेल की कीमतों में तेजी आई है और वैश्विक बाजारों में ईंधन की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। कूटनीति में गतिरोध बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता को पुनर्जीवित करने के प्रयास पहले ही ठप हो चुके थे और अब हालात और जटिल हो गए हैं।
हौथियों की आक्रामकता और क्षेत्रीय नियंत्रण
घटनाओं की नाटकीय मोड़ तब आया जब हौथियों ने यमन के पश्चिमी तट पर एक तेज़ सैन्य अभियान चलाया और इसका परिणाम मोका शहर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में पेरिम द्वीप के कब्जे के रूप में हुआ। यह रणनीतिक मार्ग पर उनका नियंत्रण स्थापित करता है। सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बल इस प्रगति को रोकने में विफल रहे। साथ ही, हौथियों ने सऊदी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले किए।
राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव
इस संघर्ष के बढ़ने के आर्थिक प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं। तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा चुकी हैं। गैस की कीमतें भी बढ़ी हैं। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता, जो पहले से ही कम चल रही है, कीमतों को और अधिक बढ़ा सकती है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से, इस संघर्ष के फैलने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। नए अभिनेता इस संघर्ष में प्रवेश कर चुके हैं और इससे कूटनीति को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ईरान और खाड़ी देशों के बीच ओमान में होने वाली बैठक स्थगित कर दी गई है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
