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AMU में छात्रसंघ चुनाव के विजेता: मोहम्मद नोमान अशरफ, नशरा नईम और मोहम्मद हमदान

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में आठ वर्षों के अंतराल के बाद हुए छात्रसंघ चुनाव का परिणाम घोषित हो गया है। इस चुनाव में मोहम्मद नोमान अशरफ ने अध्यक्ष पद पर, नशरा नईम ने उपाध्यक्ष पद पर और मोहम्मद हमदान ने सचिव पद पर जीत हासिल की है। इनकी जीत के साथ ही विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में नए चेहरों की दस्तक हुई है।

चुनाव की प्रक्रिया और परिणाम

AMU में इस बार का छात्रसंघ चुनाव क्षेत्रीय लॉबी और छात्र समूहों के बीच प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा गया। अध्यक्ष पद के लिए बिहार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छात्र समूहों के बीच कड़ी टक्कर थी। वहीं उपाध्यक्ष और सचिव पदों पर पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के छात्र समूहों के बीच मुकाबला रहा। चुनाव में किसी भी राजनीतिक पार्टी का अधिकृत पैनल नहीं था, जिससे इसे पूरी तरह से छात्र समूहों के समर्थन पर आधारित माना गया।

अध्यक्ष पद पर मोहम्मद नोमान अशरफ ने 7797 वोटों से जीत दर्ज की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद इंतखाब को 3676 वोट मिले। उपाध्यक्ष पद पर नशरा नईम को 7091 वोट प्राप्त हुए, जिससे उन्होंने साकिब अली खान को हराया। सचिव पद पर मोहम्मद हमदान ने 8385 वोटों के साथ जीत हासिल की, जबकि अहमद फराज राजी को 6882 वोट मिले।

विजेताओं का परिचय

मोहम्मद नोमान अशरफ AMU के इतिहास विभाग में पीएचडी के तीसरे वर्ष के छात्र हैं। अपने चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने 21 पन्नों का मैनिफेस्टो जारी किया, जिसमें रिसर्च स्कॉलर की फेलोशिप, छात्र सुविधाएं और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे।

नशरा नईम ने AMU के छात्रसंघ के इतिहास में उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाली पहली महिला बनकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वह लॉ फैकल्टी की BA-LLB की छात्रा हैं और उनकी जीत को महिला नेतृत्व के उभरते चरण के रूप में देखा जा रहा है।

मोहम्मद हमदान AMU में बीटेक के छात्र हैं। उनके मैनिफेस्टो में छात्राओं की सुरक्षा, हॉस्टल की समस्याएं और प्लेसमेंट जैसे मुद्दे शामिल थे।

भविष्य की चुनौतियां

नए छात्रसंघ के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें हॉस्टल की व्यवस्थाएं, पढ़ाई, प्लेसमेंट और छात्राओं की सुरक्षा प्रमुख हैं। इनके अलावा, छात्रों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी नए पदाधिकारियों के कंधों पर होगी।

यह चुनाव एक तरफ नए छात्र नेतृत्व को सामने लाता है, तो दूसरी तरफ यह क्षेत्रीय छात्र समूहों की भूमिका पर भी चर्चा को जन्म देता है। अब देखना होगा कि ये नए पदाधिकारी अपने किए गए वादों को कितनी कुशलता से पूरा कर पाते हैं।

Source: NDTV India

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