भारत में दिवाली का पांच दिवसीय पर्व विशेष महत्त्व रखता है, जिसमें छोटी दिवाली का भी एक महत्वपूर्ण स्थान है। इस वर्ष यह पर्व 7 नवंबर 2026 को मनाया जा रहा है। इसे नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन की खासियत यह है कि भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा की जाती है।
नरक चतुर्दशी का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दिवाली मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और दीपदान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मकता दूर होती है।
इस दिन अभ्यंग स्नान का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन को नरक चौदस और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है।
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
छोटी दिवाली के दिन पूजा विधि में भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की विशेष आराधना की जाती है। पूजा के शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए, भक्तजन इस दिन विशेष रूप से दीप जलाते हैं और घर को सजाते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था, जो इस पर्व का मुख्य आकर्षण है। इस कथा का महत्व इस पर्व को और भी विशेष बनाता है।
सामाजिक और धार्मिक प्रभाव
छोटी दिवाली न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह पर्व लोगों को एकजुट करता है और उनके जीवन में सकारात्मकता लाता है।
इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं, मिठाइयाँ बांटते हैं और एक साथ मिलकर खुशियाँ मनाते हैं। यह पर्व न केवल अंधकार को दूर करता है बल्कि जीवन में प्रकाश और खुशी का संचार करता है।
Source: BBC World News
