उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश में जुटी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए नई रणनीति अपनाई है। पार्टी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को चुनावी कमान सौंपी है, जो पूर्वांचल की कुर्मी बहुल सीटों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
निशांत कुमार की अगुवाई में जेडीयू
जेडीयू ने वाराणसी में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में अपने कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के नेतृत्व में निशांत कुमार को पार्टी का चेहरा बनाने का निर्णय लिया। निशांत ने कहा कि पार्टी उत्तर प्रदेश में एनडीए के घटक दल के रूप में चुनाव लड़ने की कोशिश कर रही है।
नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू उत्तर प्रदेश में पिछले दो दशकों से अपनी सियासी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उन्हें अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। बावजूद इसके, निशांत कुमार को अब चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया गया है।
जेडीयू का चुनावी इतिहास
जेडीयू ने पहली बार 2002 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ा था, जब पार्टी को समता पार्टी के नाम से जाना जाता था। उस समय पार्टी ने 9 सीटों पर चुनाव लड़ा और दो विधायकों को चुना गया था।
2004 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और आंवला सीट पर जीत हासिल की थी। 2007 में पार्टी ने 16 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल जौनपुर की रारी सीट पर जीत हासिल की।
नई चुनौतियाँ और संभावनाएँ
नीतीश कुमार का बिहार का ‘सुशासन बाबू’ मॉडल हमेशा उत्तर प्रदेश की जमीनी हकीकत से अलग रहा है। जेडीयू के पास उत्तर प्रदेश में न तो कोई बड़ा स्थानीय चेहरा है और न ही कोई मजबूत संगठनात्मक ढांचा।
निशांत कुमार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी को बीजेपी के साथ गठबंधन में कितनी सीटें मिलती हैं। यूपी में कुर्मी समुदाय की अच्छी खासी आबादी है, जो जेडीयू के लिए एक संभावित वोटबैंक हो सकता है।
Source: BBC World News
