सोनिया गांधी ने अपनी नई किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ में अपने परिवार के राजनीतिक इतिहास के कई पहलुओं को उजागर किया है। इस आत्मकथा में उन्होंने अपनी सास इंदिरा गांधी और पति राजीव गांधी के साथ अपने रिश्तों के बारे में विस्तार से लिखा है।
इमरजेंसी के फैसले पर सोनिया की राय
‘द गार्जियन’ के साथ एक साक्षात्कार में, सोनिया गांधी ने इमरजेंसी के फैसले को एक बड़ी गलती के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी को भी बाद में इस फैसले पर पछतावा हुआ। सोनिया ने इस ऐतिहासिक घटना को अपने परिवार के लिए भी एक तनावपूर्ण समय बताया।
सोनिया गांधी ने संजय गांधी को इमरजेंसी के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अगर उन्हें नियंत्रण में रखा गया होता, तो नुकसान कम हो सकता था। उन्होंने यह भी बताया कि राजीव गांधी इस कदम के खिलाफ थे और उन्होंने इंदिरा गांधी से अगले चुनाव तक इंतजार करने की सलाह दी थी।
इंदिरा गांधी की हत्या का दिन
31 अक्टूबर 1984 के उस भयानक दिन को याद करते हुए, सोनिया गांधी ने बताया कि जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई, तो वह अपने घर में थीं। उन्होंने उस समय की अपनी दहशत और असहायता का जिक्र किया जब इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने गोली मार दी थी।
सोनिया गांधी ने उस दिन की घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया, जिसमें उन्होंने इंदिरा गांधी को सफदरजंग रोड स्थित उनके आवास से अस्पताल ले जाने का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कैसे अस्पताल में भीड़ और अफरा-तफरी के बीच उन्हें इंदिरा गांधी के पार्थिव शरीर के पास नहीं जाने दिया गया।
राजीव गांधी की प्रतिक्रिया
सोनिया गांधी ने उस समय की अपनी भावनाओं को साझा किया जब राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनने की सलाह दी गई। उन्होंने इस फैसले का विरोध किया और अपनी चिंता व्यक्त की कि इस पद पर राजीव गांधी की जान को खतरा हो सकता है।
उन्होंने अपनी किताब में लिखा कि कैसे राजीव गांधी को पश्चिम बंगाल से दिल्ली वापस बुलाया गया और कैसे उन्होंने इस दुखद समाचार को सुना। सोनिया ने बताया कि राजीव गांधी के लिए यह निर्णय कितना कठिन था और उन्होंने अपने परिवार के लिए इसे कितना खतरे भरा माना।
Source: NDTV India
