जर्मनी की एक युवती जैस्मीन ने भारत के वाराणसी शहर में आकर अपने जीवन का मकसद पाया। जैस्मीन ने जर्मनी में अपनी नौकरी और स्थायी जीवन को छोड़कर भारत आने का साहसिक निर्णय लिया। उनकी इस यात्रा का मुख्य आकर्षण वाराणसी की प्रसिद्ध देव दीपावली थी।
भारत की संस्कृति से प्रभावित
जैस्मीन भारत की संस्कृति, यहां के लोगों के प्यार और आध्यात्मिकता से गहराई से प्रभावित हुईं। वह मूल रूप से एक साल के लिए भारत आई थीं, लेकिन यहां के माहौल ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने जर्मनी लौटने का विचार ही छोड़ दिया।
उन्होंने बताया कि भारत में आकर उन्होंने महसूस किया कि जीवन में असली खुशी चीजों को पास रखने में नहीं, बल्कि उन्हें महसूस करने में है। भारतीय संस्कृति के साथ उनका यह अनुभव इतना गहरा था कि उन्होंने जर्मनी में अपनी सारी चीजें छोड़कर भारत में बसने का निर्णय लिया।
देव दीपावली का सपना
जैस्मीन ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि देव दीपावली का अनुभव करना उनका सबसे बड़ा सपना था। 22 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने विज़न बोर्ड में इस अनुभव को शामिल किया था। इस बार उन्होंने वाराणसी में देव दीपावली के लिए विशेष रूप से स्टे बुक किया।
उन्होंने कहा कि यह त्योहार उनके लिए सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव था। वाराणसी की गंगा ने उनके दिल और आत्मा को छू लिया।
स्वयंसेवा से मिली संतुष्टि
भारत में जैस्मीन ने बच्चों के साथ स्वयंसेवक के रूप में काम किया, जिससे उन्हें ऐसी खुशी मिली जो उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। उन्होंने कहा कि खुशी के साथ कुछ देना, मन को बहुत तृप्ति देता है।
जैस्मीन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत में उन्हें अपनी असली खुशी और सच्ची लगन की जगह मिल गई। उन्होंने अपनी जिंदगी के असली मकसद को समझा और उसे अपनाया।
विजन बोर्ड का असर
जैस्मीन ने अपने विज़न बोर्ड का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने 22 साल की उम्र में इसे बनाया था। इस बोर्ड पर अपने सभी सपनों को शामिल किया था, और चार साल बाद वे लगभग सभी पूरे हो चुके थे।
भारत, श्रीलंका और नेपाल की यात्रा से लेकर हिमालय में ट्रेकिंग, ताजमहल और शिव ‘आदियोगी’ की प्रतिमा देखने तक, जैस्मीन ने अपने सभी सपनों को पूरा किया। उन्होंने भारत में स्वयंसेवा की, साड़ी पहनी और भारतीय संस्कृति का अनुभव किया।
Source: NDTV India
