नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह 22 से 25 नवंबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी, जिसमें वे भारत से बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए सहायता और अन्य लंबित मुद्दों पर प्रगति की उम्मीद कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान, वे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23 नवंबर को प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे।
भारत-नेपाल संबंधों की मजबूती
नेपाल इस यात्रा के माध्यम से भारत से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता चाहता है। 26 अगस्त को आई बाढ़ ने नेपाल में व्यापक स्तर पर तबाही मचाई थी, जिसमें 1,455 लोगों की मृत्यु हो गई थी और हजारों लोग घायल हो गए थे। नेपाल ने भारत से 1 अरब डॉलर के रियायती ऋण और 500 मिलियन डॉलर की अनुदान राशि की मांग की है।
इसके अतिरिक्त, नेपाल ने भारत से 2014 से अतिरिक्त हवाई मार्गों की मांग की है ताकि भैरहवा और पोखरा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के संचालन में सुधार हो सके। इस पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
पंचेश्वर परियोजना और सीमा विवाद
पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना, जो 1996 की महाकाली संधि के तहत प्रस्तावित थी, इस यात्रा के एजेंडे में एक प्रमुख मुद्दा होगी। इस परियोजना पर अब तक कम प्रगति हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच लागत साझा करने पर अब सहमति बनती दिख रही है।
सीमा विवाद, विशेषकर कालापानी और लिम्पियाधुरा से जुड़े मुद्दे, नेपाल के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, इस पर अभी तक कोई ठोस चर्चा नहीं हुई है, लेकिन नेपाली अधिकारी इसे एजेंडे में शामिल करने की उम्मीद कर रहे हैं।
आर्थिक सहयोग और परियोजनाओं का उद्घाटन
इस यात्रा के दौरान, भारत समर्थित कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा। इनमें नेपाल पुलिस अकादमी, पुलों और इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का उद्घाटन शामिल है। इसके अलावा, ऊर्जा, सड़क, रेलवे और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा की जाएगी।
भारत ने नेपाल को सूचित किया है कि अयोध्या और जनकपुर के बीच रेल सेवा की तैयारी पूरी हो चुकी है, और इसका ट्रायल रन भी सफल रहा है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को सुलझाने और संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगी।
Source: NDTV India
