अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनावों के परिणामों का असर केवल अमेरिकी राजनीति तक सीमित नहीं रहा है। पाकिस्तान में भी इन चुनावों के नतीजों को लेकर चिंता की लहर दौड़ गई है। खासकर, पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है।
पाकिस्तान और ट्रंप प्रशासन के संबंध
पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन के साथ करीबी संबंध बनाए रखे थे। ट्रंप के कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ एक लेन-देन वाला रिश्ता स्थापित किया था। इसमें सेना प्रमुख असीम मुनीर का प्रमुख योगदान था, जो इस्लामाबाद और व्हाइट हाउस के बीच मुख्य संपर्क सूत्र बने रहे।
हालांकि, ट्रंप के करीबी सहयोगियों से जुड़ी कुछ डील्स अब अमेरिकी कांग्रेस की जांच के दायरे में आ गई हैं। इससे पाकिस्तान की सरकार और सैन्य नेतृत्व के लिए संभावित आर्थिक फायदों पर खतरा मंडरा रहा है।
आम पाकिस्तानी जनता की उम्मीदें
आम पाकिस्तानी लोगों का मानना है कि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन से उनके देश के आर्थिक संकट में कुछ राहत मिल सकती है। कराची के रहने वाले सज्जाद अली ने कहा कि जब तक अमेरिका में सरकार नहीं बदलती, तब तक शांति और आर्थिक सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती।
आसिम ज़फर, जो कराची के निवासी हैं, ने उम्मीद जताई कि इस चुनावी परिणाम से ट्रंप पर लगाम लगेगी और मुस्लिम देशों के खिलाफ हो रहे अन्याय को रोकने में मदद मिल सकती है।
विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन के साथ अपने संबंधों पर बहुत अधिक भरोसा किया है। वाशिंगटन स्थित स्टिमसन सेंटर के सीनियर फेलो डैनियल मार्की ने चेतावनी दी कि अगर ये सौदे निजी स्वार्थों से प्रेरित लगते हैं, तो दोनों देशों के संबंधों पर बुरा असर पड़ सकता है।
अटलांटिक काउंसिल के माइकल कुगेलमैन ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और ईरान को लेकर पाकिस्तान की कूटनीति को अमेरिकी दलों का समर्थन हासिल है। लेकिन पाकिस्तान के लिए खतरा यह है कि उसने अपनी कूटनीति का सारा दारोमदार ट्रंप प्रशासन पर लगा दिया है।
Source: NDTV India
