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एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में राजदूतों ने भारत की भूमिका और विश्व व्यवस्था पर चर्चा की

नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में वैश्विक राजनीति और भारत की भूमिका पर गहन चर्चा हुई। इस सम्मेलन में जर्मनी, इटली, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया के राजदूतों ने भाग लिया। इस सत्र का शीर्षक था ‘द वेस्ट, रीवायर्ड: द न्यू ट्रांसअटलांटिक ऑर्डर’, जिसमें तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में यूरोप के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास किया गया।

रूस और यूक्रेन के मुद्दे पर यूरोप का दृष्टिकोण

भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर वीक ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर यूरोप के एकजुट दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को यूरोप का समर्थन केवल जर्मनी और फ्रांस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक प्रयास है। यूरोप का उद्देश्य अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करना है, क्योंकि रूस के इरादे यूक्रेन से भी आगे के हैं।

भारत-जर्मनी के रक्षा संबंध

जर्मनी के राजदूत ने भारत के साथ रक्षा सहयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप’ के माध्यम से भारत के साथ साझेदारी को और गहरा करने की बात कही।

चीन को लेकर ऑस्ट्रेलिया की चिंता

भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने चीन के साथ आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के चीन के साथ संबंधों में तनाव के बावजूद, देश ने अन्य बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत की है। उन्होंने चीन के सैन्य विस्तार पर चिंता व्यक्त की और कहा कि ऑस्ट्रेलिया अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सजग है।

यूरोप का ईरान और अन्य वैश्विक मुद्दों पर दृष्टिकोण

भारत में इटली के राजदूत एंटोनियो बार्तोली ने ईरान के साथ संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चाहे मानवाधिकार हों या अन्य मुद्दे, बातचीत जारी रहनी चाहिए। उन्होंने IMEC और मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए साझा समृद्धि की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

भारत के साथ यूरोपीय संघ के संबंध

यूरोपीय संघ के राजदूत जॉन-एरिक पकेट ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस समझौते से व्यापारिक रास्ते खुलेंगे और भारतीय निर्यातकों के लिए टैरिफ में कमी आएगी। उन्होंने निवेश संरक्षण समझौते पर भी बातचीत के पूरा होने की उम्मीद जताई।

इस समिट ने वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका और यूरोप के साथ उसके संबंधों को नई दिशा देने का अवसर प्रदान किया।

Source: NDTV India

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