पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के चकदह गांव में इस बार की दिवाली विशेष रही है। आजादी के 79 साल बाद, गांव में पहली बार बिजली पहुंची है, जिससे वहां के आदिवासी परिवारों के जीवन में एक नई रोशनी आई है। वर्षों से अंधेरे में जी रहे इन परिवारों के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं है।
आदिवासी परिवारों को मिला लाभ
गांव में बिजली आने से लगभग 400 आदिवासी परिवारों को सीधा लाभ हुआ है। अब बच्चों की पढ़ाई में आसानी होगी और रात के समय सामान्य जीवन जीने में सहूलियत मिलेगी। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस दिन की लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे।
खंभे लगे थे लेकिन बिजली नहीं थी
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में कई साल पहले बिजली के खंभे तो लगा दिए गए थे, लेकिन घरों तक बिजली नहीं पहुंच पाई थी। इस कारण लोगों को अंधेरे में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता था। दिवाली से पहले बिजली आपूर्ति शुरू होने के बाद गांव की तस्वीर बदल गई है।
खुशी और संतोष का माहौल
बिजली आने के बाद, लोगों ने इसे अपने जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक बताया है। शाम होते ही घरों और गलियों में रोशनी दिखाई देने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और गांव का विकास भी तेजी से होगा।
दिवाली पर रोशनी बनी सबसे बड़ा उपहार
दिवाली के समय पर बिजली आने से गांव के लोगों का वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ है। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही है। उनके लिए यह केवल त्योहार ही नहीं बल्कि विकास और नई शुरुआत की रोशनी भी साथ लेकर आई है।
Source: NDTV India
