रूस की प्रसिद्ध हथियार निर्माता कंपनी कलाश्निकोव कंसर्न ने भारत में एक नई दिशा में कदम बढ़ाया है। कंपनी ने भारत में MP-155 शॉटगन के स्थानीय उत्पादन के लिए एक भारतीय साझेदार के साथ लाइसेंसिंग समझौता किया है। इस शॉटगन का उपयोग मुख्यतः एंटी-ड्रोन कार्यों में किया जाएगा।
MP-155 शॉटगन का विवरण
MP-155 एक सेमी-ऑटोमैटिक 12 गेज शॉटगन है, जिसे मूल रूप से शिकार के लिए डिज़ाइन किया गया था। हालांकि, यह ड्रोन के खिलाफ भी प्रभावी साबित हुई है। इस शॉटगन का उत्पादन 2012 में इज़ेव्स्क मैकेनिकल प्लांट में शुरू हुआ था।
इसका वजन 3.15 से 3.8 किलोग्राम के बीच होता है और यह 12/76 और 12/89 कैलिबर के कारतूस चला सकती है। इसके एंटी-ड्रोन संस्करण में पिकाटिनी रेल, रेड-डॉट साइट, नाइट विजन डिवाइस और विस्तारित मैगजीन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
भारत में उत्पादन और सहयोग
कलाश्निकोव का यह कदम भारत-रूस रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में है। कंपनी पहले से ही भारत में इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए AK-203 असॉल्ट राइफलों का उत्पादन कर रही है। MP-155 का लाइसेंसिंग समझौता इसी सहयोग का विस्तार है।
हालांकि, भारतीय साझेदार का नाम, उत्पादन स्थल, मात्रा और समय-सीमा की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। उत्पादन रूसी तकनीकी सहायता के साथ किया जाएगा और धीरे-धीरे स्थानीय सामग्री का हिस्सा बढ़ाया जाएगा।
आत्मनिर्भरता और सुरक्षा
यह कदम भारत की आत्मनिर्भरता की नीति के अनुरूप है। देश में ड्रोन खतरे से निपटने के लिए स्वदेशी और विदेशी दोनों विकल्पों पर काम हो रहा है। सुरक्षा एजेंसियां और सशस्त्र बल सस्ते तथा प्रभावी एंटी-ड्रोन समाधान तलाश रहे हैं।
MP-155 शॉटगन न केवल सैन्य बल्कि आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। यूक्रेन संघर्ष समेत कई मोर्चों पर इसकी प्रभावशीलता सिद्ध हो चुकी है।
Source: BBC World News
