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बिहार की नदियों की गाद बनेगी इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधार

बिहार सरकार ने अपनी जलस्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति 2026 के तहत एक नई योजना की शुरुआत की है, जिसे ‘नदी संजीवनी’ नाम दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य नदियों से निकाली गई गाद का प्रभावी उपयोग करना है।

गाद का उपयोग

नई नीति के अनुसार, बिहार की नदियों से निकाली गई गाद को अब राष्ट्रीय राजमार्गों, पुलों, टाउनशिप, एयरपोर्ट और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण में भराव सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाएगा। यह कदम न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी होगा, बल्कि निर्माण लागत में भी कमी लाएगा।

इस योजना के तहत, गाद निकासी और उपयोग का पूरा खर्च केंद्र और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे बिहार सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन

गाद प्रबंधन के तहत, नदियों की गहराई बढ़ने से बाढ़ का खतरा कम होगा। जल भंडारण क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। नेपाल से आने वाले जलप्रवाह और फरक्का बैराज के बैकवाटर प्रभाव से प्रभावित गंगा और उसकी सहायक नदियों में जमा सिल्ट को हटाया जाएगा।

इस प्रक्रिया से नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ेगी और मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी का संग्रहण बेहतर तरीके से किया जा सकेगा, जिससे जल संकट को कम किया जा सकेगा।

कृषि और पर्यावरणीय लाभ

गाद के उपयोग से सड़क और तटबंध निर्माण के लिए किसानों की उपजाऊ भूमि की खोदाई की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इससे लाखों एकड़ कृषि भूमि बंजर होने से बचाई जा सकेगी।

वैज्ञानिक ड्रेजिंग से नदियों की प्राकृतिक धारा बहाल होगी, जिससे जलीय जीवों का निवास स्थान सुरक्षित रहेगा। नदियों से निकाली गई गाद का उपयोग निर्माण स्थलों के पास ही किया जाएगा, जिससे परिवहन लागत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

Source: NDTV India

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