कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कांग्रेस विधायक के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई कार्रवाई को रद्द कर दिया है। यह फैसला 7 नवंबर 2026 को सुनाया गया और कोर्ट ने इस मामले में ईडी की भूमिका को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ईडी को सुपर कॉप की तरह कार्य करने की अनुमति नहीं है। यह भी स्पष्ट किया गया कि एजेंसी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके हर मामले की जांच नहीं कर सकती। इस नाते, हाईकोर्ट ने कांग्रेस विधायक के खिलाफ ईडी द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी और इसके आधार पर की गई कार्रवाई को रद्द कर दिया।
कोर्ट का निर्णय और ईडी की सीमाएँ
हाईकोर्ट ने इस मामले में ईडी द्वारा की गई कार्रवाई को अनुचित मानते हुए कहा कि एजेंसी को अपनी शक्तियों का सही ढंग से और सीमित दायरे में उपयोग करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ईडी को किसी भी मामले में बिना उचित आधार के संज्ञान नहीं लेना चाहिए।
यह निर्णय कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण आदेश का हिस्सा है, जिसमें प्रवर्तन एजेंसियों के कार्यों पर निगरानी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इस फैसले के जरिए कोर्ट ने यह संदेश दिया है कि सरकारी एजेंसियों को अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
कांग्रेस पार्टी ने इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे न्याय की जीत बताया है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि न्यायपालिका स्वतंत्र है और राजनीतिक दबाव में काम नहीं करती। अब देखना यह है कि क्या ईडी इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करती है या नहीं।
इस बीच, राजनीतिक हलकों में इस निर्णय को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल इस पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं और इसे आगामी चुनावी रणनीतियों में भी शामिल करने की बात कर रहे हैं।
Source: BBC World News
