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सोनिया गांधी ने इंदिरा गांधी के आपातकाल संघर्ष का किया उल्लेख

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ में आपातकाल के दौर का विस्तृत वर्णन किया है। इस पुस्तक में उन्होंने उस समय की कठिनाइयों और चुनौतियों का उल्लेख किया, जिनका सामना तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को करना पड़ा था।

आपातकाल का दौर

सोनिया गांधी ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि 1975 से 1977 के बीच लागू हुए आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी बिगड़ते हालात से निपटने के लिए संघर्षरत थीं। उन्होंने कहा कि कई चुनौतियाँ उस समय बेहद कठिन थीं, और इंदिरा गांधी को तेजी से बिगड़ते हालात का सामना करना पड़ा।

सोनिया गांधी ने द हिंदू को दिए गए एक लिखित इंटरव्यू में बताया कि आपातकाल के खत्म होने के बाद ही उन्हें पूरी तरह से समझ में आया कि उस समय क्या कुछ हुआ था और उसकी गंभीरता कितनी अधिक थी। उन्होंने माना कि उस दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया गया था और ‘हेबियस कॉर्पस’ को निलंबित कर दिया गया था।

विरोध और इंदिरा गांधी का निर्णय

सोनिया गांधी ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि उस समय विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे और सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन में आगजनी की घटनाएँ हुईं। नौकरशाही और सशस्त्र बलों से आदेश न मानने की अपील भी की गई।

उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी ने मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला किया था। इस निर्णय के पीछे उन्होंने सार्वजनिक रूप से अफसोस जताया और आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों के लिए माफी भी मांगी थी।

सोनिया गांधी की पुस्तक का महत्व

सोनिया गांधी का यह बयान और उनकी पुस्तक का यह हिस्सा कांग्रेस के इतिहास के सबसे संवेदनशील विषय, आपातकाल, पर प्रकाश डालता है। यह पुस्तक इस दौर के घटनाक्रम को समझने में सहायक है और सोनिया गांधी के अनुभवों का सजीव चित्रण करती है।

Source: NDTV India

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