उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने हाल ही में समाजवादी पार्टी (सपा) को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) में शामिल होने के अपने फैसले के पीछे के कारणों की व्याख्या की। उन्होंने अयोध्या में आयोजित पंचायत आजतक कार्यक्रम में भाग लिया, जहां उन्होंने अपने राजनीतिक सफर और आस्था से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात की।
सपा से अलग होने का कारण
मनोज पांडेय ने बताया कि उनका लगभग 30 वर्षों का राजनीतिक जीवन समाजवादी पार्टी के साथ बीता, लेकिन जब पार्टी में भगवान राम और हिंदू आस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठने लगे, तो उनके लिए वहां बने रहना कठिन हो गया। उन्होंने कहा कि “राम किसी दल के नहीं हैं; वे आस्था का विषय हैं और इस पर किसी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” उनके इस बयान ने सपा के अंदरूनी मामलों पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
पांडेय ने यह भी कहा कि जब सपा में राम के प्रति सम्मान कम होने लगा, तब उन्हें यह महसूस हुआ कि उनकी आस्था को चुनौती दी जा रही है। उनके अनुसार, यह परिवर्तन उनके लिए व्यक्तिगत रूप से असहनीय था और इसलिए उन्होंने नई पार्टी चुनने का निर्णय लिया।
भाजपा में नई भूमिका
भाजपा में शामिल होने के बाद, मनोज पांडेय ने कहा कि वे अपनी नई भूमिका में भगवान राम और हिंदू मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने भाजपा के कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे एकजुट होकर काम करें ताकि राम की मान्यता और उनकी आस्था को और मजबूती दी जा सके।
मनोज पांडेय की यह बात राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। उनके इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक आस्था के मुद्दों का कितना महत्व है। भाजपा में शामिल होकर, पांडेय ने यह भी दर्शाया कि वे अपने सिद्धांतों के प्रति कितने गंभीर हैं।
Source: BBC World News
