लोकप्रिय गायिका कल्पना पटवारी ने हाल ही में बज्जिका भाषा में एक नया छठ गीत रिलीज किया है। इस गीत का नाम “रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल” है और यह छठ पर्व के अवसर पर प्रस्तुत किया गया है। कल्पना पटवारी की इस प्रस्तुति को फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है और सोशल मीडिया पर इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
छठ गीतमाला में कई भाषाओं के गीत
कल्पना पटवारी ने इस वर्ष छठ महापर्व के लिए एक विशेष ‘छठ गीतमाला’ तैयार की है। इस गीतमाला में मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका भाषाओं के सात गीत शामिल हैं। इस नए बज्जिका गीत के माध्यम से कल्पना ने छठ पर्व के दौरान होने वाली असमय वर्षा और उससे उत्पन्न स्थितियों को व्यक्त किया है।
इस गीत में छठ व्रतियों की भावनाओं को छठी माता के प्रति प्रकट करते हुए दिखाया गया है। इसमें आंगन लिपाने, फूल बिछाने, हवन कराने, और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पण करने जैसी परंपराओं का उल्लेख किया गया है।
बिहार की लोकसंस्कृति से लगाव
कल्पना पटवारी, जो असम की रहने वाली हैं, ने बिहार की लोकसंस्कृति और उसकी विरासत के प्रति अपने गहरे लगाव का इज़हार किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग से राष्ट्रीय कला पुरस्कार भी मिल चुका है।
इस पुरस्कार के बाद भी उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक परंपराओं के लिए काम करने की इच्छा जताई थी। यही कारण है कि उन्होंने इस छठ पर्व पर अलग-अलग भाषाओं में छठ गीत प्रस्तुत किए हैं।
विविधता में एकता
इस गीतमाला में शामिल अन्य गीतों में मैथिली के ‘चारि पहर राति जल थल सेविलहुँ’ और ‘कातिक मास इजोरिया’, भोजपुरी के ‘जगत के पालक दीनानाथ’ और ‘दरसन मांगीला तोहार हे गंगा मैया’, मगही के ‘छोटी मुटी मालिन बेटी के भुइयाँ लोटे केस’, अंगिका के ‘छठि मइया अइतई अंगनमा सजन हम करबई बरतिया’ जैसे गीत शामिल हैं।
इन गीतों का संकलन हृदय नारायण झा की पुस्तक ‘छठगीत (सर्वसौभाग्यदायकम्)’ से किया गया है। कल्पना के अनुसार, एक ही गायिका द्वारा पांच भाषाओं में छठ गीतों की प्रस्तुति एक दुर्लभ प्रयास है।
Source: NDTV India
