बिहार के पटना जिले के मनेर थाना क्षेत्र में पुलिस और एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में तीन संदिग्ध अपराधियों की मौत के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने दानापुर सदर अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जहां शवों को पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया।
पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़
एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के अनुसार, पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम इलाके में गश्त कर रही थी, जब उन्हें सूचना मिली कि कुछ अपराधी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो अपराधियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। इस मुठभेड़ में तीन अपराधियों की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान जयप्रकाश यादव, राजा कुमार और बबलू यादव के रूप में की गई है। उनके खिलाफ हत्या, रंगदारी और अवैध हथियार रखने के कई मामले दर्ज थे। पुलिस ने इस मुठभेड़ में 18 गोलियां चलाईं, जबकि अपराधियों की तरफ से 24 से अधिक गोलियां दागी गईं।
मीसा भारती का बयान
आरजेडी सांसद मीसा भारती ने इस घटना पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बिहार में मुठभेड़ों की घटनाएं बढ़ गई हैं और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर एक खास जाति के लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। मीसा भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से एक विशेष समुदाय के खिलाफ बयान देते हैं और पुलिस को निर्देश देते हैं।
उन्होंने दानापुर के विधायक रामकृपाल यादव की भी आलोचना की, जो मृतकों के परिजनों से मिलने नहीं पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई, जिसमें एएसपी अजीत कुमार को मामूली चोटें आईं।
घटना की जांच
एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि इस मुठभेड़ की स्वतंत्र न्यायिक जांच की जाएगी। शवों का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी के साथ कराया जाएगा। पुलिस ने दावा किया कि मुठभेड़ के दौरान बरामद हथियारों से यह पुष्टि होती है कि मृतक अपराधी गंभीर अपराधों में लिप्त थे।
इस घटना ने स्थानीय राजनीति को भी गर्मा दिया है, जहां विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाए हैं कि पुलिस का उपयोग राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है।
Source: NDTV India
