महाराष्ट्र की प्रमुख सहकारी दुग्ध संस्था, गोकुल डेयरी, में सत्ता का समीकरण बदलने की संभावना बढ़ गई है। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने एक अध्यादेश को मंजूरी प्रदान की है, जिससे सरकार को चार गैर-सरकारी निदेशकों की नियुक्ति करने की अनुमति मिल गई है। इन निदेशकों को मतदान का अधिकार भी होगा, जिससे गोकुल डेयरी की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है।
राजनीतिक समीकरण में बदलाव
गोकुल डेयरी के वर्तमान निदेशक मंडल में कांग्रेस समर्थित 13 निदेशक हैं, जबकि महायुति गठबंधन के पास 12 निदेशकों का समर्थन है। ऐसे में नए गैर-सरकारी निदेशकों की नियुक्ति और उन्हें मतदान का अधिकार मिलने से अध्यक्ष पद के चुनाव में समीकरण बदल सकते हैं।
10 नवंबर को गोकुल डेयरी के अध्यक्ष पद का चुनाव होना है। इस चुनाव से पहले अध्यादेश के लागू होने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कानूनी विवाद की संभावना
पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने इस अध्यादेश की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह अध्यादेश अदालत में चुनौती का सामना कर सकता है और संभव है कि न्यायिक जांच में टिक न पाए। इस कारण, राज्यपाल की मंजूरी के बावजूद कानूनी लड़ाई की संभावना बनी हुई है।
सत्ता संघर्ष पर प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गोकुल डेयरी में संख्या बल के मौजूदा अंतर को देखते हुए, चार नए निदेशकों की नियुक्ति और उन्हें मतदान अधिकार मिलने से अध्यक्ष पद का चुनाव प्रभावित हो सकता है। 10 नवंबर का चुनाव अब पहले से अधिक दिलचस्प और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Source: NDTV India
