संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने एक नई रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान में अमेरिकी हमलों में युद्ध अपराधों के संकेत हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में ईरान के मिनाब और लामर्ड में हुए मिसाइल हमलों में कम से कम 177 नागरिकों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इन हमलों में नागरिकों की मौत और नागरिक इमारतों को नुकसान पहुंचा, जो युद्ध अपराधों के दायरे में आता है।
मिनाब और लामर्ड हमलों की जांच
फैक्ट-फाइंडिंग मिशन की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को मिनाब में शजरे तैय्यबेह प्राथमिक विद्यालय पर अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया गया, जिसमें कम से कम 156 लोग मारे गए। इसमें 120 बच्चे भी शामिल थे। इस हमले का उद्देश्य विद्यालय को ही निशाना बनाना था, जबकि पास के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नौसेना परिसर पर भी हमला हुआ था।
मिशन के विशेषज्ञों का दावा है कि लामर्ड में खेल परिसर पर हुआ हमला भी अमेरिका द्वारा किया गया था। इस हमले में कम से कम 21 नागरिक मारे गए थे। अमेरिकी सेना ने लामर्ड पर हमले से इनकार किया है और कहा है कि वे मिनाब हमले की जांच कर रहे हैं।
ईरान में सरकार द्वारा मानवता के खिलाफ अपराध
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने ईरान में जनवरी में सरकार द्वारा विरोध प्रदर्शनों के दमन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि सभी 31 प्रांतों में सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या की।
रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों ने छतों और ऊँचाई पर स्थित स्थानों से भीड़ पर गोलीबारी की। इस दौरान कई लोगों को गंभीर चोटें आईं और उन्हें चिकित्सा सुविधाओं से वंचित किया गया। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को यातना दी गई और उन्हें कानूनी सहायता से वंचित रखा गया।
ईरानी अधिकारियों ने इन आरोपों का खंडन किया है और इन मौतों के लिए आतंकवादियों और उपद्रवियों को दोषी ठहराया है।
