हाल ही में एक गंभीर धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ है जिसमें एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, प्रदीप कुमार दास, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। दास, जो केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पूर्व निदेशक रह चुके हैं, ने आरोप लगाया है कि उन्हें एक डिजिटल गिरफ्तारी स्कैम के तहत 1.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
पुलिस के अनुसार, दास ने जब इस धोखाधड़ी के बारे में जानकारी दी, तो उन्होंने बताया कि आरोपियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वह एक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, उन्हें धोखे से पैसे देने के लिए मजबूर किया गया।
पुलिस ने जांच शुरू की और इस मामले में 11 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों के पास से कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं जो इस धोखाधड़ी के संचालन में शामिल थे।
धोखाधड़ी का तरीका
जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उन्होंने इस स्कैम को चलाने के लिए उच्च तकनीकी साधनों का उपयोग किया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने पीड़ितों को यह विश्वास दिलाने के लिए फर्जी कॉल्स और मैसेज का सहारा लिया कि उनकी गिरफ्तारी एक कानूनी कारण से हो रही है।
इस प्रक्रिया में, दास को यह बताया गया कि उन्हें किसी गंभीर अपराध में फंसने से बचाने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की आवश्यकता है। इस प्रकार, उन्होंने खुद को एक जाल में फंसता हुआ पाया और अपनी मेहनत की कमाई खो दी।
पुलिस की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और संबंधित आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त की गई हैं, जो इस तरह के अपराधों के नेटवर्क का पता लगाने में मदद कर सकती हैं।
पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे और भी कई पीड़ित हो सकते हैं जो इसी तरह के धोखाधड़ी के शिकार बने हैं। आगे की जांच जारी है और पुलिस ने आम जनता को इस प्रकार के मामलों से सावधान रहने की सलाह दी है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहे हैं कि ऐसे मामलों में और लोगों को धोखा न मिले।
Source: NDTV India
