दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी नेताओं द्वारा केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। रैली में केंद्र सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाया गया।
विपक्ष की महारैली
रामलीला मैदान में आयोजित इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के तेजस्वी यादव समेत 20 से अधिक नेताओं ने हिस्सा लिया। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह तक जाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 के चुनावों के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ती रहेंगी। वहीं, तेजस्वी यादव ने ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने और जेल भेजने की मांग की।
बीजेपी का जवाबी प्रदर्शन
विपक्ष की इस रैली के जवाब में बीजेपी ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए दिल्ली और हरियाणा में प्रदर्शन किए। हरियाणा के रोहतक में बीजेपी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की अगुवाई में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा आयोजित की। इसके अलावा, दिल्ली के हरि नगर में बीजेपी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की याद में एक मौन मार्च निकाला।
बीजेपी ने विपक्ष की रैली को ‘सुपर फ्लॉप’ करार देते हुए दावा किया कि रामलीला मैदान का एक बड़ा हिस्सा खाली रह गया था।
जन महाभियोग और मॉक संसद
रामलीला मैदान की इस रैली से पहले, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एक ‘मॉक संसद’ और ‘जन महाभियोग’ का आयोजन किया गया था। इसमें 21 दलों के सांसदों और नेताओं ने भाग लिया। इस बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 6 आरोप लगाते हुए एक महाभियोग प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सभी नेताओं ने ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से बर्खास्त करने की मांग की।
Source: BBC World News
