अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अल नीनो के बढ़ते प्रभाव के चलते कई देशों में चेतावनी जारी की गई है। भारत के वित्त मंत्रालय की अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, महंगाई के मोर्चे पर अभी भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। इसमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, समुद्री माल ढुलाई में रुकावटें और अल नीनो के कारण कृषि क्षेत्र में संभावित व्यवधान शामिल हैं।
अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है जो समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण उत्पन्न होता है। यह वैश्विक मौसम को प्रभावित करता है और कई देशों में सूखा या बाढ़ जैसी स्थितियों का कारण बन सकता है। ऐसे में, भारत सरकार ने इस खतरे को देखते हुए कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए विशेष योजनाएँ तैयार की हैं।
बोलिविया जैसे देशों ने भी अल नीनो के खतरे को भांपते हुए इमरजेंसी घोषित की है। इसकी वजह से कृषि उपज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिससे खाद्य संकट उत्पन्न हो सकता है। भारत में भी किसानों को अल नीनो के संभावित प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है ताकि समय पर उपाय किए जा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो के प्रभाव को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट को और भी गंभीर बना सकता है। इसलिए, विभिन्न देशों ने आपसी सहयोग और तैयारी पर जोर दिया है। भारत में भी कृषि मंत्रालय ने सूखा सहिष्णु फसलों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया है।
सरकार के साथ-साथ निजी क्षेत्र भी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहा है। कई कंपनियाँ मौसम पूर्वानुमान और कृषि अनुसंधान में निवेश कर रही हैं ताकि अल नीनो के प्रभाव को कम किया जा सके। इसके अलावा, किसानों को मौसम की जानकारी और सही समय पर फसल बोने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है।
Source: NDTV India
