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पंजाब में AAP को दो दिन में तीसरा बड़ा झटका

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) को एक और बड़ा झटका लगा है। अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने अपनी विधायकी से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा दो दिनों के भीतर पार्टी के लिए तीसरा बड़ा झटका है। इससे पहले चेतन सिंह जौरामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था।

कुंवर विजय प्रताप सिंह का इस्तीफा

कुंवर विजय प्रताप सिंह, जो पहले ही AAP द्वारा निलंबित किए जा चुके थे, ने 1 नवंबर को विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपा। उनकी पार्टी से नाराजगी की वजहें पहले भी सामने आ चुकी थीं। कुंवर विजय प्रताप ने 2015 के बरगाड़ी बेअदबी और पुलिस फायरिंग मामलों की जांच में देरी को लेकर सरकार की आलोचना की थी।

जनवरी 2023 में, उन्होंने सरकारी आश्वासन समिति के चेयरमैन पद से भी इस्तीफा दे दिया था। इसके पीछे भी उनका सरकार से मतभेद था, खासकर जब वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने के मामले में स्पीकर के हस्तक्षेप की बात आई।

सरकार से मतभेद और आरोप

कुंवर विजय प्रताप सिंह ने AAP सरकार पर स्वराज के मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पंजाब में अपराध, नशा, जबरन वसूली और गैंगस्टरवाद पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने पार्टी और सरकार में गैंगस्टरों और उनके परिवारों के प्रभाव का भी मुद्दा उठाया था।

उन्होंने 2025 में अमृतसर में जहरीली शराब से हुई मौतों और शराब माफिया के कथित प्रभाव का मुद्दा भी उठाया था। उनके इन आरोपों के चलते पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था।

पार्टी में बढ़ता संकट

कुंवर विजय प्रताप सिंह के इस्तीफे के बाद AAP के भीतर राजनीतिक संकट गहरा गया है। इससे पहले, बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी पर सवाल उठाने के बाद उनके मतभेद और बढ़ गए थे। AAP ने उनके बयानों को पार्टी विरोधी गतिविधि घोषित किया था।

पंजाब में AAP को लगातार हो रहे इन इस्तीफों से पार्टी के लिए चुनौतियाँ बढ़ गई हैं। आगामी विधानसभा चुनावों में यह घटनाक्रम पार्टी की स्थिति पर गहरा असर डाल सकता है।

Source: BBC World News

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