लद्दाख के स्टोक गांव का अनुभव एक 35 वर्षीय महिला प्रेरणा दलाल के लिए जीवन बदलने वाला साबित हुआ। उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर बनने का फैसला किया और लद्दाख की अनदेखी सुंदरता का अनुभव करने के लिए निकल पड़ीं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने 14 दिन स्टोक गांव में बिताए, जो लेह से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
स्टोक गांव का विशेष आकर्षण
स्टोक गांव कांगरी पहाड़ों के बीच बसा हुआ है और यह अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। प्रेरणा ने बताया कि वह यहां कुछ दिनों के लिए घूमने आई थीं, लेकिन इस जगह की शांति और सौंदर्य ने उन्हें 14 दिन रुकने के लिए मजबूर कर दिया। इस दौरान उन्होंने लद्दाख के आखिरी राजा के घर का भी दौरा किया।
उन्होंने वीडियो के माध्यम से साझा किया कि कैसे वह गांव की छोटी-छोटी दुकानों और रास्तों से परिचित हो गईं। इस गांव में बिताए गए समय ने उन्हें स्थानीय जीवन और संस्कृति को करीब से जानने का अवसर दिया।
स्थानीय जीवन का अनुभव
प्रेरणा ने अपनी यात्रा के दौरान केवल पर्यटक स्थलों का ही आनंद नहीं लिया बल्कि स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया और लद्दाखी मोमोज बनाना भी सीखा। होमस्टे में रहते हुए उन्होंने मेजबान के साथ चाय पर चर्चा की और स्थानीय लोगों से घुल-मिल गईं। यह अनुभव उनके लिए एक विशेष यादगार बन गया।
स्लो ट्रैवल का महत्व
प्रेरणा का मानना है कि स्लो ट्रैवल यानी धीरे-धीरे यात्रा करना, किसी जगह को गहराई से जानने का सबसे अच्छा तरीका है। उन्होंने कहा, “जब आप किसी जगह के लोगों को जान पाते हैं और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनते हैं, तब वह जगह आपके दिल में एक खास स्थान बना लेती है।”
स्लो ट्रैवल के इस अनुभव को उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो के माध्यम से साझा किया, जो अब वायरल हो चुका है। इस वीडियो ने स्टोक गांव को सुर्खियों में ला दिया है और लोगों को स्लो ट्रैवल की ओर आकर्षित किया है।
Source: BBC World News
