चीन ने हाल ही में एक वीडियो जारी किया है जिसमें उसकी DF-26B मिसाइल अमेरिकी विमानवाहक पोत के मॉडल पर हमला करती दिखाई गई है। यह परीक्षण शिनजियांग के ताकलामाकन रेगिस्तान में किया गया। इस कदम को चीन की दुश्मन को रोकने की क्षमता का प्रदर्शन माना जा रहा है, खासकर ताइवान और दक्षिण चीन सागर के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में।
DF-26B मिसाइल की विशेषताएँ
DF-26B मिसाइल एक रोड-मोबाइल प्रणाली है, जिसकी रेंज लगभग चार हजार किलोमीटर है। यह मिसाइल भारी वॉरहेड ले जाने में सक्षम है और इसे ‘कैरियर किलर’ के रूप में जाना जाता है क्योंकि इसे विशेष रूप से विमानवाहक पोतों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। इसकी मोबाइल क्षमता इसे दुश्मन की निगरानी से बचाने में मदद करती है, जिससे इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
ताकलामाकन रेगिस्तान में इस मिसाइल का परीक्षण करना चीन की एंटी-एक्सेस और एरिया डिनायल रणनीति का हिस्सा है। इस रणनीति का उद्देश्य दुश्मन की सेना को किसी क्षेत्र में आसानी से प्रवेश करने से रोकना है।
सैन्य और राजनीतिक संदेश
वीडियो में मिसाइल को बड़े विमानवाहक पोत के आकार के टारगेट पर सटीक निशाना लगाते हुए दिखाया गया है, जिससे टारगेट पूरी तरह नष्ट हो जाता है। यह कदम चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता का संकेत देता है और यह दिखाता है कि वह दूर से ही बड़े जहाजों को निशाना बना सकता है।
यह प्रदर्शन ताइवान और दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण चीन की रक्षा क्षमता को दिखाने के साथ-साथ एक राजनीतिक संदेश भी है कि वह क्षेत्रीय विवादों में अपनी ताकत का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है।
प्रतिक्रिया और चिंताएं
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि रेगिस्तान में एक स्थिर टारगेट पर हमला करना समुद्र में एक गतिशील विमानवाहक पोत को निशाना बनाने से अलग है। असली युद्ध में विमानवाहक पोत के आसपास कई सुरक्षा प्रणालियाँ होती हैं, जो मिसाइल को बीच में ही रोक सकती हैं। फिर भी, यह परीक्षण चीन की तकनीकी और सैन्य तैयारी का संकेत जरूर देता है।
इस परीक्षण के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है और अमेरिका तथा उसके सहयोगी देशों द्वारा इस पर निगरानी रखी जा रही है।
Source: BBC World News
