⚡ Breaking News

नए प्रांतों की मांग पर नकवी ने दिया जोर

पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने शनिवार को देश के प्रशासनिक ढांचे में सुधार की मांग करते हुए कहा कि पाकिस्तान की बढ़ती जनसंख्या और बदलती जरूरतें मौजूदा प्रशासनिक संरचना के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रबंधित नहीं की जा सकतीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नए प्रशासनिक इकाइयों का निर्माण अनिवार्य है।

प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की आवश्यकता

लाहौर में यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में ‘पावर का विकेंद्रीकरण और पाकिस्तान में सुशासन’ पर एक राष्ट्रीय नीति संवाद के दौरान नकवी ने स्पष्ट किया कि उनका प्रस्तावित ‘रीसेट’ किसी विशेष सरकार या राजनीतिक पार्टी को बदलने का प्रयास नहीं है, बल्कि प्रशासनिक प्रणाली की समीक्षा और पुनर्गठन की आवश्यकता है ताकि यह नागरिकों की जरूरतों के प्रति उत्तरदायी हो सके।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगभग आठ दशकों के बाद भी अपने नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सेवाएं प्रदान करने में संघर्ष कर रहा है। उन्होंने जोर दिया कि प्रशासनिक सीमाओं का पुनर्गठन अनिवार्य है और इसे संवैधानिक और कानूनी ढांचे के भीतर और राजनीतिक सहमति के माध्यम से किया जाना चाहिए।

इस्लामाबाद को प्रांतीय दर्जा देने की बहस

नकवी ने इस्लामाबाद को प्रांतीय दर्जा देने की बहस का आह्वान किया, यह कहते हुए कि संघीय राजधानी के निवासी राष्ट्रीय वित्त आयोग (एनएफसी) पुरस्कार के तहत एक हिस्सा प्राप्त नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि नए प्रांतों का निर्माण किया जाना है, तो इस्लामाबाद को भी प्रांत का दर्जा दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नए प्रशासनिक इकाइयों का निर्माण बिना जन समर्थन के नहीं होना चाहिए और लोगों की राय इस मुद्दे पर राजनेताओं से अधिक महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पावर के विकेंद्रीकरण को ‘अनिवार्य’ बताया और पीपीपी पर नए प्रांतों के मुद्दे पर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब पंजाब में सरायकी प्रांत की बात होती है, तो पीपीपी इसका समर्थन करती है, लेकिन जब चार प्रांतों के बजाय कई प्रांतों या प्रशासनिक इकाइयों की बात होती है, तो ‘सिंधुदेश’ की बात शुरू हो जाती है।

वहीं दूसरी ओर, पीपीपी ने संघीय सरकार के नए प्रांतों और प्रशासनिक इकाइयों के बयानों का विरोध किया है। सिंध पीपीपी नेतृत्व ने संघीय मंत्रियों पर प्रांत के संवैधानिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि कोई भी कदम सिंध की एकता, प्रांतीय स्वायत्तता या संवैधानिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

पीटीआई की प्रतिक्रिया

पीटीआई ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चुप्पी पर सवाल उठाया, जिससे संवैधानिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री संघ के भविष्य के प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे पर बहस से क्यों अनुपस्थित रहे हैं।

इस बीच, अलीम खान के नेतृत्व वाली इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी ने नए प्रांतों के निर्माण पर पीएमएल-एन के योजना मंत्री अहसान इकबाल के बयान का स्वागत किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *