दूरदर्शन पर प्रसारित रामानंद सागर की रामायण अपने अद्वितीय संगीत और गीतों के लिए विशेष रूप से जानी जाती है। इसी श्रृंखला में श्रीराम और सीता के विवाह पर आधारित एक ऐसा गीत है जो आज भी लोगों के दिलों को छूता है। यह दिवाली के शुभ अवसर पर इसे याद करना अनिवार्य हो जाता है। इस पवित्र गीत ने रामायण के उस खास एपिसोड को अमर बना दिया, जिसमें श्रीराम और सीता के विवाह का वर्णन किया गया है।
रवींद्र जैन का संगीतिक योगदान
रवींद्र जैन, जिनकी आवाज़ और संगीत ने इस गीत को अमर कर दिया, ने ‘श्री रघुवर कोमल कमल नयन को पहनाओ जयमाला’ गीत को लिखा और संगीतबद्ध किया। इस गीत ने रामायण के उस पवित्र क्षण को सजीव कर दिया जब श्रीराम ने शिवधनुष तोड़ा और सीता ने उन्हें जयमाला पहनाई।
रवींद्र जैन अकेले ही संगीत की पूरी जिम्मेदारी संभालते थे। वे न केवल गीत लिखते थे, बल्कि संगीत देने और गाकर उसमें चार चांद लगाने का काम भी बखूबी करते थे। उनके इस योगदान ने रामानंद सागर की रामायण को एक अनमोल धरोहर बना दिया।
जयमाला प्रसंग का जीवंत चित्रण
रामायण का यह गीत जनकपुर में सीता स्वयंवर के उस क्षण को चित्रित करता है जब राजा जनक की शर्त पूरी हो चुकी होती है। श्रीराम ने वह धनुष तोड़ दिया है जिसे कोई हिला भी नहीं पाया था। इस खुशी के मौके पर जनकपुर में आनंद की लहर दौड़ जाती है और सीता सखियों के संग श्रीराम के पास आती हैं।
गीत की पृष्ठभूमि में यह सीन और भी मनमोहक बन जाता है। रवींद्र जैन का यह गीत उस समय के टीवी दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव बन गया था। आज भी इस गीत की तुलना में कोई दूसरा गीत नहीं है जो इसकी बराबरी कर सके।
Source: NDTV India
