दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाया जाता है। इस बार दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। खास बात यह है कि इस अवसर पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा की जाती है।
लक्ष्मी और गणेश का दिवाली से संबंध
माता लक्ष्मी को धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में समुद्र मंथन के दौरान लक्ष्मी जी का प्रकट होना हुआ था। मान्यता है कि दिवाली की रात लक्ष्मी जी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाशित और श्रद्धा से भरे घरों में निवास करती हैं।
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा से होती है। दीपावली पर गणेश जी की पूजा का यह संदेश है कि जीवन में केवल धन होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही दिशा में उपयोग करने के लिए बुद्धि और विवेक का होना भी आवश्यक है।
संयुक्त पूजा का महत्व
लक्ष्मी और गणेश जी की संयुक्त पूजा का महत्व यह है कि जहां लक्ष्मी जी समृद्धि और सुख का प्रतीक हैं, वहीं गणेश जी ज्ञान, समझदारी और सही निर्णय लेने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं। धन के साथ विवेक न हो, तो समृद्धि भी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए दीपावली पर दोनों की पूजा कर लोग जीवन में धन और विवेक, दोनों का आशीर्वाद मांगते हैं।
पौराणिक कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार लक्ष्मी जी को अपने धन और वैभव पर अभिमान हो गया था। भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि भले ही संसार में हर कोई उनकी कृपा पाना चाहता है, लेकिन मातृत्व के बिना उनका जीवन अधूरा है। इससे लक्ष्मी जी उदास हो गईं। माता पार्वती ने गणेश जी को उनकी गोद में बैठा दिया, जिससे लक्ष्मी जी प्रसन्न हुईं और गणेश जी को अपना पुत्र स्वीकार कर लिया।
इसके बाद लक्ष्मी जी ने वरदान दिया कि जो भी उनकी पूजा करेगा, उसे गणेश जी की आराधना भी जरूर करनी होगी। ऐसा करने से भक्त को दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Source: NDTV India
