दिल्ली-NCR क्षेत्र में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति ने लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल कर दिया है। इस क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मंगलवार को 334 तक पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इस स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण को लागू कर दिया है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम
GRAP-2 के लागू होने के साथ ही क्षेत्र में कई सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। नगर निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे सड़कों की सफाई और धूल के नियंत्रण के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव करें। इसके अलावा, एंटी-स्मॉग गन का भी उपयोग किया जा रहा है। निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों से उत्पन्न मलबे के उचित प्रबंधन के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच भी तेज कर दी गई है। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों पर प्रतिबंधों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर प्रतिबंध
GRAP-2 के तहत उद्योगों, ईंट भट्ठों, और बिजली संयंत्रों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इन्हें केवल स्वीकृत ईंधन का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। होटल और रेस्टोरेंट को तंदूर में कोयला और लकड़ी का उपयोग बंद कर बिजली या गैस से चलने वाले उपकरणों का उपयोग करने को कहा गया है।
मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का प्रभाव
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अनुसार, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण आने वाले दिनों में भी प्रदूषण से राहत मिलने की संभावना कम है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटीरियोलॉजी (IITM) के पूर्वानुमानों में भी वायु गुणवत्ता में सुधार के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
GRAP के विभिन्न चरणों के अंतर्गत, AQI 201 से 300 के बीच होने पर GRAP-1 लागू होता है, जबकि 301 से 400 के बीच GRAP-2 और 401 से 450 के बीच GRAP-3 लागू किया जाता है। 450 से ऊपर AQI होने पर GRAP-4 लागू होता है।
Source: BBC World News
