⚡ Breaking News

दिल्ली HC ने ACP मनस्वी वशिष्ठ के मामले में स्वतः संज्ञान लेने से किया इनकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एसीपी मनस्वी वशिष्ठ द्वारा वकीलों को कथित रूप से धमकाने के मामले में स्वतः संज्ञान लेने से मना कर दिया। इस संबंध में वकीलों ने कोर्ट में बताया कि एसीपी ने उनके खिलाफ विवादास्पद टिप्पणियाँ की थीं।

इस मामले में वकीलों ने कोर्ट में आरोप लगाया कि मनस्वी वशिष्ठ ने उन्हें “काले कोट के गुंडे” कहकर संबोधित किया और साथ ही AK-47 का भी उल्लेख किया। इस पर कोर्ट ने वकीलों को सुझाव दिया कि वे इस मामले में औपचारिक याचिका दायर करें।

दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा शामिल थे। बेंच ने दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) संजय लाओ को निर्देश दिया कि वे वकीलों द्वारा दायर की गई याचिका की एक कॉपी प्राप्त करें।

वकीलों द्वारा उठाए गए मुद्दे

वकीलों ने कोर्ट में अपनी चिंताएं व्यक्त कीं, जिसमें एसीपी के द्वारा की गई टिप्पणियों का गंभीरता से उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ न केवल उनके अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती हैं।

इस मामले में वकीलों ने एसीपी के व्यवहार को निंदनीय करार दिया और न्यायालय से उचित कार्रवाई की मांग की। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है।

अगले कदम

कोर्ट ने वकीलों को स्पष्ट किया कि उन्हें इस मामले में औपचारिक रूप से याचिका दायर करनी होगी ताकि उचित सुनवाई की जा सके। इस निर्णय के बाद, वकीलों ने इस मामले में आगे की रणनीति तैयार करने की योजना बनाई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के इस निर्णय ने आगामी कानूनी प्रक्रियाओं के लिए एक नई दिशा दिखाई है। वकीलों का मानना है कि उनकी आवाज को उचित महत्व दिया जाना चाहिए ताकि न्याय की प्रक्रिया में सुधार हो सके।

Source: BBC World News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *