भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है, जिससे नागरिकों की जीवन प्रत्याशा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स 2025 के अनुसार, अगर दिल्ली की हवा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित मानकों तक साफ होती, तो वहां के निवासियों की उम्र में औसतन 8.2 साल की वृद्धि हो सकती थी।
प्रमुख शहरों पर प्रदूषण का असर
इसी रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता में यह प्रभाव 4.1 साल का होता, जबकि हैदराबाद में 3.2 साल, मुंबई में 3.1 साल, चेन्नई में 2.2 साल और बेंगलुरु में 2.1 साल की वृद्धि देखी जा सकती थी। यह आंकड़े इस तथ्य को रेखांकित करते हैं कि भारत के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण कैसे लोगों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 और 2025 में दिल्ली में एक भी ऐसा दिन नहीं था जब हवा की गुणवत्ता अच्छी रही हो। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह विभिन्न रोगों के बढ़ते जोखिम को भी दर्शाती है।
विश्लेषण और निष्कर्ष
इंडिया टुडे ग्रुप की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट ने इस समस्या के गहराई में जाकर विश्लेषण किया है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि वायु प्रदूषण का स्तर अगर नियंत्रण में नहीं लाया गया तो इसके दीर्घकालिक प्रभाव और भी गंभीर हो सकते हैं।
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें श्वसन संबंधी बीमारियाँ प्रमुख हैं। यह स्थिति उन लोगों के लिए और भी चिंताजनक है जो प्रतिदिन सुबह-सुबह व्यायाम के लिए बाहर जाते हैं।
Source: BBC World News
