ब्रिटेन द्वारा कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के बाद, इजरायल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। इजरायल ने ब्रिटेन के फिलिस्तीनियों के लिए राजनयिक मिशन को बंद करने, गाजा के पास अंतरराष्ट्रीय समन्वय बेस से ब्रिटिश सैन्य कर्मचारियों को निकालने और लगभग एक दर्जन वामपंथी ब्रिटिश सांसदों के इजरायल में प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की। यह एक स्पष्ट संकेत था कि इजरायल इस कदम के खिलाफ है।
ब्रिटेन की नैतिक दलील
ब्रिटेन ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि उसका मानना था कि दो-राज्य समाधान को बचाने के लिए यह नैतिक दायित्व है। ब्रिटेन ने इजरायल सरकार पर फिलिस्तीनियों के “जातीय सफाया” को अनदेखा करने का आरोप लगाया। इस बीच, यूरोप के 11 अन्य देशों ने भी इस व्यापार प्रतिबंध में शामिल होने की योजना बनाई है।
अमेरिकी प्रतिक्रिया
अक्सर इजरायल के पक्ष में खड़ा रहने वाला अमेरिका इस बार ब्रिटेन के फैसले पर चुप्पी साधे रहा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि “हम ब्रिटेन की तरह नहीं करेंगे,” और उन्होंने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन के बीच इस विषय पर पहले से चर्चा हो चुकी थी।
हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वे इजरायल से बात करेंगे ताकि यह समझ सकें कि अचानक ऐसा क्यों हुआ। ट्रंप प्रशासन के भीतर इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर चर्चाएं हो रही हैं, और ऐसा लगता है कि अमेरिका के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कदम के खिलाफ स्थिति बनी हुई है।
वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं
ट्रंप प्रशासन द्वारा ब्रिटेन के कदम की आलोचना करने की संभावना अभी भी बनी हुई है। लेकिन इजरायल के नेतृत्व से वर्तमान में नाराजगी के कारण ट्रंप ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। मुख्य रूप से, ट्रंप का ध्यान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में संकट को रोकने पर है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ ट्रंप के संबंधों में कई तनावपूर्ण बिंदु हैं। ट्रंप चाहते हैं कि गाजा शांति पहल में प्रगति हो, लेकिन नेतन्याहू ने इस योजना को खारिज कर दिया है। इस समय, ट्रंप का ध्यान ईरान से निपटने और गाजा शांति योजना पर है, इसलिए वे इजरायल के समर्थन में नहीं आए हैं।
