भारतीय शास्त्रीय नृत्य ‘कथक’ की प्रमुख हस्ती सितारा देवी ने अपनी नृत्य कला से न केवल भारतीय सिनेमा बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी एक विशेष पहचान बनाई। उनका जन्म 8 नवंबर 1920 को कोलकाता के एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनका असली नाम धनलक्ष्मी था और परिवार में उन्हें प्यार से धन्नो बुलाया जाता था।
शुरुआती जीवन और नृत्य की शुरुआत
सितारा देवी के पिता सुकदेव महाराज एक संस्कृत विद्वान और कथक के गुरु थे, जबकि उनकी मां मथुरा देवी भी पारंपरिक नृत्य में निपुण थीं। बचपन से ही सितारा को नृत्य में गहरी रुचि थी। मात्र 10 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार मंच पर प्रदर्शन किया।
12 वर्ष की उम्र तक मुंबई पहुँचने के बाद, उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में ‘नागिन’ फिल्म में अपने नृत्य का जादू बिखेरा। उनके अद्वितीय नृत्य कौशल को देखकर रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें ‘नृत्य सम्राज्ञी’ की उपाधि से सम्मानित किया।
फिल्मी करियर और निजी जीवन
सितारा देवी ने अपने करियर में 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। ‘आवारा’, ‘मदर इंडिया’, और ‘हरे राम हरे कृष्ण’ जैसी फिल्मों में उनके नृत्य की आज भी प्रशंसा की जाती है। उनके जीवन में उतार-चढ़ाव भी आए। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने चार शादियां कीं। पहली शादी 8 वर्ष की उम्र में श्री देसाई से हुई, जो बाद में टूट गई। इसके बाद उन्होंने अभिनेता नजीर अहमद खान से शादी की, जिसके लिए उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया, लेकिन यह रिश्ता भी ज्यादा नहीं चला। फिर उन्होंने फिल्म निर्देशक के. आसिफ से विवाह किया, जो अधिक समय तक नहीं टिक पाया। अंत में, उन्होंने गुजराती व्यवसायी प्रताप बारोट से शादी की।
सम्मान और अंतिम वर्ष
भारतीय कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री और कालिदास सम्मान से नवाजा गया। हालांकि, पद्म भूषण पुरस्कार को उन्होंने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि उनका योगदान इससे भी अधिक है और उन्होंने ‘भारत रत्न’ की मांग की।
94 वर्ष की आयु में भी सितारा देवी मंच पर अपने नृत्य का प्रदर्शन करती रहीं। 2013 में उनकी अंतिम प्रस्तुति मुंबई में हुई। 25 नवंबर 2014 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके घुंघरुओं की गूंज और नृत्य की कला हमेशा जीवित रहेगी।
Source: NDTV India
