फ्रांस में हाल ही में हुई एक व्यापक हड़ताल और प्रदर्शन ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से वेतन वृद्धि और महंगाई के खिलाफ था, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए। राजधानी पेरिस सहित कई शहरों में प्रदर्शनकारियों की भीड़ उमड़ी।
प्रदर्शन का कारण और विस्तार
फ्रांस में बढ़ती महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ नाराजगी के चलते यह प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक सेवाओं में कटौती और प्रस्तावित 2027 बजट के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। पेरिस के नेशन स्क्वायर पर प्रदर्शन का समापन झांकियों और आतिशबाजी के साथ हुआ। हालांकि, माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें शुरू हो गईं।
पेरिस में हिंसक झड़पें
पेरिस में मुख्य मार्च प्लेस द ला रिपब्लिक से शुरू हुआ और दिनभर के प्रदर्शन के बाद नेशन स्क्वायर पर समाप्त हुआ। जैसे ही रैली खत्म हुई, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें शुरू हो गईं। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और कई लोगों को गिरफ्तार किया। इस दौरान 53 पुलिसकर्मी भी घायल हुए।
अन्य शहरों में प्रदर्शन
लियोन में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई, जहां एक वाहन में आग लगा दी गई। इसके अलावा मार्सेई में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महंगाई के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि सरकार नागरिकों की क्रय शक्ति बढ़ाए और वेतन में वृद्धि करे।
आंदोलन का समर्थन
ट्रेड यूनियनों के साथ-साथ छात्रों और शिक्षकों ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया। फ्रांस के 3,700 हाई स्कूलों में से 81 में प्रदर्शन हुए। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, करीब 16 प्रतिशत शिक्षक भी हड़ताल में शामिल हुए।
सरकार पर दबाव
फ्रांस के गृह मंत्री ने पहले ही हिंसा की स्थिति में सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। हालांकि, पुलिस के रवैये की आलोचना भी हुई है। पुलिस की कार्रवाई की जांच शुरू कर दी गई है।
इस आंदोलन ने न केवल फ्रांस बल्कि ग्रीस तक भी अपनी गूंज पहुंचाई, जहां छात्रों और शिक्षकों ने बेहतर शिक्षा सुविधाओं की मांग को लेकर रैली निकाली।
Source: NDTV India
