हस्तरेखा शास्त्र में हथेली पर मौजूद बुध पर्वत को बुद्धि, वाणी और व्यापारिक समझ से जोड़कर देखा जाता है। आचार्य मदन मोहन के अनुसार, यदि यह पर्वत उभरा हुआ हो तो यह व्यक्ति के आत्मविश्वास और करियर में सफलता के संकेत देता है।
बुध पर्वत का स्थान और महत्व
हथेली में सबसे छोटी उंगली के नीचे का मांसल हिस्सा बुध पर्वत कहलाता है। इसे देखने के लिए अपनी हथेली को सामने की ओर करके कनिष्ठा उंगली के नीचे वाले हिस्से को देखें। हस्तरेखा शास्त्र में इस पर्वत को व्यक्ति की बुद्धिमानी और व्यवहार कुशलता से जोड़कर देखा जाता है।
यदि बुध पर्वत अच्छी तरह से विकसित और उभरा हुआ हो तो इसे शुभ माना जाता है। ऐसे लोग समझदार और तेज दिमाग वाले होते हैं। इन्हें नई चीजें सीखने में रुचि रहती है और उनकी बातचीत करने की कला भी सराहनीय होती है। व्यापार के क्षेत्र में भी इन्हें समझदार माना जाता है।
बुध पर्वत पर रेखाओं का महत्व
हस्तरेखा शास्त्र में बुध पर्वत पर बनी रेखाओं का विशेष महत्व होता है। यदि इस पर्वत पर साफ और सीधी खड़ी रेखाएं दिखाई देती हैं तो इन्हें शुभ संकेत माना जाता है। ऐसी रेखाएं कारोबार में तरक्की और धन लाभ की ओर इशारा करती हैं।
दबा हुआ बुध पर्वत के संकेत
यदि कनिष्ठा उंगली के नीचे का हिस्सा सपाट या दबा हुआ दिखाई देता है, तो इसे कमजोर बुध पर्वत माना जाता है। ऐसे व्यक्ति को निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है और आत्मविश्वास की कमी के कारण अपनी योग्यता को ठीक से जाहिर नहीं कर पाते।
व्यापार और नौकरी में सफलता पाने के लिए इन्हें अधिक मेहनत की आवश्यकता होती है। अपनी बात खुलकर कहने में भी इन्हें झिझक हो सकती है।
Source: NDTV India
