इजरायल में हाल ही में हुए आम चुनाव के नतीजे बुधवार को आधिकारिक रूप से घोषित कर दिए गए, जिससे नई सरकार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा सके। केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट जस्टिस नोअम सोहलबर्ग ने राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग को ये नतीजे सौंपे।
नेतन्याहू की पार्टी के आरोप
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने चुनाव के दौरान अरब क्षेत्रों में अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए नतीजों के प्रकाशन को रोकने की मांग की थी। लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त और राष्ट्रपति दोनों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने स्पष्ट कहा कि अरब समुदाय के वोटों पर शक करना उचित नहीं है और चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बताया।
सरकार गठन की प्रक्रिया
इस चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, जिससे राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। अब राष्ट्रपति को यह तय करना होगा कि किसे सरकार बनाने का न्योता दिया जाए।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावनाएं तलाशने का समय है। नेतन्याहू की पार्टी को इस बार चुनाव में चुनौती का सामना करना पड़ा है, और उन्हें सरकार बनाने के लिए अन्य दलों का समर्थन जुटाना होगा।
अरब समुदाय की भूमिका
अरब समुदाय का वोट इस चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है। ऐसे में नेतन्याहू की पार्टी के आरोपों पर राष्ट्रपति और चुनाव आयुक्त का रुख स्पष्ट है कि किसी भी समुदाय के वोटों पर संदेह करना लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।
इस स्थिति में, इजरायल के राजनीतिक परिदृश्य में अरब समुदाय की भूमिका और बढ़ जाती है, जो नई सरकार के गठन में अहम साबित हो सकती है।
Source: BBC World News
